नई दिल्ली. भारत अंडर-19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने आईपीएल ऑक्शन के समय अपने खिलाड़ियों के फोन नहीं जब्त किए थे, ना ही उन्हें स्विच ऑफ करने को कहा था. उन्होंने युवा खिलाड़ियों को बस यह नसीहत दी थी कि वह नीलामी पर अधिक ध्यान ना दे, क्योंकि इससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है. यह खुलासा अंडर-19 विश्व विजेता टीम के तेज गेंदबाज शिवम मावी ने किया है.

लगभग 6 फीट लंबे इस तेज गेंदबाज ने इनखबर.कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि द्रविड़ सर ने कभी हमारे मोबाइल को जब्त करने या स्विच ऑफ करने का ऑर्डर नहीं दिया था. उन्होंने बस इतना कहा था कि ऐसी चीजें खिलाड़ियों खासकर युवा खिलाड़ियों को अधिक आकर्षित करती हैं  और इससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावित भी हो सकता है. इसलिए उन्होंने हमसे इन चीजों पर ध्यान ना देने की बात कही थी. उन्होंने खिलाड़ियों से कहा था कि आईपीएल या ऐसा कोई भी टूर्नामेंट हर साल आता है लेकिन यह विश्व कप उनकी जिंदगी में बस एक बार आएगा. इसलिए सिर्फ यहां पर रहें और बिना किसी से प्रभावित हुए इस टूर्नामेंट के हर एक पल को जीने और जीतने की कोशिश करें.

हालांकि ये युवा और शरारती खिलाड़ी मानने कहां वाले थे. टीम मीटिंग के दौरान शिवम मावी चुपके से मोबाइल चलाते हुए आईपीएल नीलामी के अपडेट्स देख रहे थे, जिसे शांत राहुल द्रविड़ ने पकड़ लिया और बाद में एक मीठी डांट भी पिलाई.

द्रविड़ एक दूरदर्शी कोच, बेंगलुरु कैम्प से मिला विश्व कप में लाभ  

राहुल द्रविड़ के बारे में बताते हुए मावी कहते हैं कि वह वाकई में एक लीजेंड हैं और उनका क्रिकेटिंग ऩॉलेज गजब का है. वह एक दूरदर्शी कोच हैं. इसलिए उन्होंने टूर्नामेंट से पहले बेंगलुरू में एक कैम्प लगाया था और हमें उन सब कठिन परिस्थितियों का सामना करवाया था जो हमें न्यूजीलैंड में मिलने जा रही थी. इस कैम्प के दिनों को याद करते हुए मावी ने कहा कि वे दिन काफी कठिन थे. द्रविड़ सर ने हमसे काफी मेहनत करवाई थी. लेकिन इसका फायदा हमें न्यूजीलैंड में मिला और हमें वहां कठिन परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाने में कुछ खास दिक्कत नहीं हुई.

मीडिया में बन रही द्रविड़ की एक सख्त और अनुशासनात्मक कोच की छवि पर मावी ने कहा कि ऐसा नहीं है. वह हम युवा खिलाड़ियों के साथ एक दोस्त की तरह रहते थे और कभी-कभी हमारे साथ मस्ती भी कर लेते थे. टीम के विश्व कप जीत के बाद उन्होंने ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के साथ डांस भी किया था जो हम लोगों के लिए एक सुखद आश्चर्य वाला लम्हा था. बस द्रविड़ सर हमेशा कहते रहते थे कि फोकस रहो और अपने रास्ते से ना भटको.

पारस म्हाम्ब्रे ने दिया अनुशासित गेंदबाजी का गुरूज्ञान

टीम के बॉलिंग कोच पारस म्हाम्ब्रे के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि उनके टीम में होने से हम तेज गेंदबाजों को खासी मदद मिली. वह हमेशा हमसे गति नहीं लाइन-लेंथ पर ध्यान देने और अनुशासित गेंदबाजी करने की बात करते थे. हमने ऐसा ही किया जिसका फायदा हमें पूरे टूर्नामेंट के दौरान मिला.

फिटनेस और फोकस’ ही है लगातार तेज गेंदबाजी का राज

लगातार 140-145 की स्पीड से गेंद फेकने के राज के बारे में जब इस गेंदबाज से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका राज ‘फिटनेस और फोकस’ है. वह लगातार नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) द्वारा दिए गए फिटनेस प्रोगाम को फॉलो कर रहे हैं ताकि उनका फिटनेस बरकरार रहे. उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम को फॉलो कर वह चोटों से बचे रह सकते हैं, जो दशको से भारतीय तेज गेंदबाजों की एक प्रमुख समस्या रही है.

पृथ्वी और शुभमन का था सेलिब्रेशन का यूनिक आईडिया

भारतीय क्रिकेट का अगला सितारा माने जा रहे टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ के बारे में शिवम ने कहा कि पृथ्वी का टीम में होना एक प्लस प्वाइंट जैसा रहा. उनके पास प्रथम श्रेणी का अनुभव था जिसका पूरी टीम को लाभ हुआ. उन्हें पता होता था कि कौन से बल्लेबाज पर कहां फील्डर तैनात करना है. विश्व कप जीत के बाद हुए ‘यूनिक सेलिब्रेशन’ के बारे में पूछने पर शिवम ने कहा कि यह कप्तान पृथ्वी शॉ और उपकप्तान शुभमन गिल का ही आइडिया था.

शिवम ने बताया कि शुभमन गिल औऱ अभिषेक शर्मा टीम के सबसे शरारती खिलाड़ी थे, जो हमेशा टीम को हसाते और उनका मनोरंजन करते थे. शिवम ने कहा कि वह इमोशनल पल था जब सारे खिलाड़ी भारत लौटने के बाद अपने-अपने घर जा रहे थे. हालांकि अब भी सभी खिलाड़ी एक दूसरे के टच में हैं और आगे के टूर्नामेंट्स की तरफ देख रहे है.

आईपीएल और घरेलू क्रिकेट पर है नजर

आगे की जर्नी के बारे में शिवम ने बताया कि वह फिलहाल अभी आईपीएल की तरफ देख रहे हैं. कोलकाता नाइटराइडर्स की तरफ से 3 करोड़ में खरीदे गए शिवम ने कहा कि वह जॉक कालिस, मिशेल जॉनसन और मिशेल स्टार्क जैसे लीजेंड तेज गेंदबाजों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने की बात सोच कर ही एक्साइटेड हो जाते हैं. शिवम इन खिलाड़ियों से बड़े मैचों में प्रेसर-हैंडलिंग यानी दबाव से निपटने का गुर सीखना चाहते हैं. इसके अलावा कोलकाता की टीम में शिवम के साथी तेज गेंदबाज कमलेश नागरकोटी और बल्ल्बाज शुभमन गिल भी हैं, जिससे शिवम को टीम के साथ सामंजस्य बनाने में कुछ ज्यादा तकलीफ नहीं होगी.

आईपीएल से पहले शिवम मुंबई में होने वाले डीवाई टूर्नामेंट्स में भी भाग लेंगे. वह कहते हैं कि उनका ध्यान सिर्फ आईपीएल नहीं घरेलू टूर्नामेंट्स खासकर रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने पर है जिससे वह टीम इंडिया में जगह बना पाने के करीब पहुंचे. हालांकि शिवम अभी कोई बड़ा नहीं बल्कि छोटे-छोटे गोल लेकर चलने की बात कर रहे हैं. मीडिया में मिल रही लाइमलाइट पर शिवम ने कहा कि वह इसको अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे और सिर्फ अपने प्रदर्शन और फिटनेस पर ही ध्यान देंगे.

शुरूआत में बल्लेबाज बनना चाहते थे मावी

अपने शुरूआती क्रिकेटिंग जीवन के बारे में बताते हुए शिवम ने कहा कि उन्होंने आठ साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया. शुरूआत में वह इसे शौकिया रूप में खेलते थे लेकिन 12 साल की उम्र में उन्होंने इसे ही अपना कैरियर बनाने की ठानी. शिवम एक दिलचस्प बात बताते हुए कहते हैं कि वह शुरू में एक बल्लेबाज थे लेकिन एक दिन नेट्स पर बॉलिंग करते हुए उन्हें उनके कोच ने देख लिया. शिवम के कोच को उनका गेंदबाजी एक्शन सही लगा और उन्हें एक बॉलिंग ऑलराउंडर बनने की सलाह दी. इसके बाद से वह गेंदबाजी करने लगे.

शिवम ने बताया कि वह पहले और भी अधिक गति से तेज गेंदबाजी करते थे लेकिन तीन साल पहले हुए एक घुटने की चोट ने उनके गेंदबाजी एक्शन और पेस को प्रभावित किया. वह अब एक आउट स्विंग गेंदबाज से इन स्विंग गेदबाज हो गए और उनकी गति भी थोड़ी धीमी हो गई. हालांकि मावी अब भी लगातार 140-145 की गति से गेंदबाजी करने का माद्दा रखते हैं.

यार्कर डालना है पसंद

पेस और स्विंग गेंदबाजी के बारे में शिवम ने बताया कि शुरूआत में जब गेंद नई होती है तो वह स्विंग गेंदबाजी और पुरानी गेंद होने पर पेस गेदबाजी करना पसंद करते हैं. यार्कर, बाउंस या शॉर्ट गेंद के बारे में पूछने पर शिवम ने कहा कि उन्हें यार्कर डालना पसंद है औऱ वह अगामी आईपीएल में डेथ ओवर्स में इसी को ही अपना हथियार बनाएंगे.

पिता को छोड़नी पड़ी थी सरकारी नौकरी

डेल स्टेन और जसप्रीत बुमराह को अपना आदर्श मानने वाले इस क्रिकेटर ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें शुरूआत में क्रिकेट को करियर बनाने में काफी दिक्कतें आई. कुछ आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा. अच्छे एकेडमी की तलाश में शिवम को परिवार सहित मेरठ से नोएडा शिफ्ट होना पड़ा और उनके पिता को सरकारी नौकरी भी छोड़नी पड़ी. इस वजह से एक समय परिवार में मुश्किल हालात भी आए. लेकिन जल्द ही उनका परिवार इन सबसे उबर गया.

विश्व कप जीतने के बाद बीसीसीआई ने सभी खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि सौंपी हैं. इसके अलावा शिवम को अच्छा खासा आईपीएल कांट्रैक्ट भी मिल गया है. इसके बाद आने वाले दिनों में अब उन्हें ऐसी किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना होगा. विश्व कप जीतने के बाद यूपी सरकार की तरफ से किसी भी तरह का पुरस्कार या सरकारी सहायता मिलने के प्रश्न पर अनभिज्ञता जताते हुए मावी ने कहा कि उन्हें अब तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. फिलहाल वह इस तरफ देख भी नहीं रहे और आने वाले दिनों में अच्छा प्रदर्शन कर टीम इंडिया में जगह बनाना चाहते हैं.

बड़े खिलाड़ियों के तारीफ से मिलती हैं प्रेरणा

विश्व कप के समय न्यूजीलैंड में कमेंट्री कर रहे पूर्व खिलाड़ियों खासकर सौरव गांगुली और इयान बिशप से मिले तारीफ को याद करते हुए शिवम कहते हैं कि अच्छा लगता है जब कोई बड़ा खिलाड़ी आपकी तारीफ करता है. इससे उन्हें लगातार और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है. अपने निजी जीवन के बारे में बताते हुए इस शर्मीले क्रिकेटर ने बताया कि वह क्रिकेट के साथ-साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देते हैं और फिलहाल बीबीए थर्ड ईयर के छात्र हैं.

शिवम की पढ़ाई में उनके टीचर्स भी पूरी सहायता देते हैं और शिवम की व्यस्तता को देखते हुए उनके लिए नोट्स तैयार करके देते है, जिसे शिवम रोज शाम को प्रैक्टिस के बाद पढ़ते हैं. बॉलीवुड गाने के शौकीन शिवम खाली समय में टेबल टेनिस भी खेलना पसंद करते हैं. कुछ घरेलू शौक के बारे में पूछने पर शिवम ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें खाना बनाना नहीं पर खाना खाना जरूर पसंद है.

अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के तेज गेंदबाज शिवम मावी से एक्सक्लूसिव बातचीतShivam MAVI

Posted by InKhabar on Tuesday, 13 February 2018

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