England player Joe Roots : इंग्लैंड टीम टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बाद फिर चर्चा में है. उसके कई खिलाड़ियों ने बहुत ही उम्दा प्रदर्शन किया है. इस बीच अंदरूनी सूत्रों ने बताया है कि जो रूट फिर से ‘बैम्बी’ वाली स्थिति में क्यों आ गए हैं? उनके LBW होने की समस्या की भी चर्चा हो रही है, जिसे वह ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. डिज़्नी के इस कैरेक्टर वाला निकनेम उन्हें उनके यॉर्कशायर यूथ कोच ने तब दिया था, जब किशोरावस्था में उनकी लंबाई तेज़ी से बढ़ी और उसी दौरान वे कई बार LBW आउट हुए. उनकी लंबाई में अचानक बदलाव आया और वो काउंटी के सबसे छोटे बल्लेबाज़ों में से एक से बढ़कर 6 फ़ीट से ज़्यादा लंबे हो गए. इसका उन पर अजीब असर पड़ा. जो रूट ने अपनी 2015 की किताब ‘ब्रिंगिंग होम द एशेज़’ में बताया था कि उन्हें क्रीज़ पर खुद को बढ़ते हुए महसूस होता था.
बैटिंग गुरु केविन शार्प ने दिया ‘बैम्बी’ नाम
वहीं, इसका असर उनके नैचुरल बैलेंस पर पड़ा, जिससे क्रीज़ पर उनके गिरने की संभावना बढ़ गई. इसी वजह से बैटिंग गुरु केविन शार्प ने उन्हें ‘बैम्बी’ नाम दिया और सीम-बॉलिंग करने वाले काउंटी एकेडमी के विरोधी गेंदबाज़ों की गेंदें अक्सर उनके पैड पर लगने लगीं. अपनी शानदार बैटिंग क्षमता और सफल होने के पक्के इरादे की वजह से जो रूट ने शार्प की मदद से LBW होने की समस्या पर काबू पा लिया था, लेकिन रूट मानते हैं कि उनके शानदार टेस्ट करियर के दौरान यह समस्या बार-बार सामने आती रही है.
केविन शार्प ने ‘डेली मेल स्पोर्ट’ को बताया कि कुछ साल पहले जब उन्हें पहली बार इंग्लैंड का कप्तान बनाया गया था, तब उन्होंने मुझसे कहा था कि उन्होंने गेंदबाज़ के गेंद फेंकने से पहले की अपनी मूवमेंट को सही करने के लिए सालों तक काम किया है. वह थोड़ा पीछे हटते हैं और फिर अपने फ्रंट फ़ुट पर टिके रहते हैं, लेकिन इन सब चीज़ों का तालमेल सही होना चाहिए. अगर वह अपने पिछले पैर पर टिके हुए हैं और उनका अगला पैर पिछले पैर से आगे निकलकर मिड-ऑफ की तरफ जाता है, तो वह खुद को ब्लॉक कर सकते हैं, जिससे उनका बैलेंस बिगड़ सकता है.
बार-बार LBW होते हैं जो रूट
यहां पर बता दें कि वर्ष 2021 में रूट के लिए LBW की समस्या पहली बार सामने आई थी. इसमें 13 पारियों में आठ बार आउट होना शामिल है. तब स्वर्गीय ग्राहम थोरपे इंग्लैंड के बैटिंग कोच थे. उससे पहले, 2016 में 15 पारियों में आठ बार आउट होने का दौर आया था. इस बार, पिछली सर्दियों की एशेज़ से लेकर अब तक वह 12 पारियों में नौ बार आउट हो चुके हैं, जिसमें लगातार सात बार आउट होना भी शामिल है. हालांकि, ट्रेंट ब्रिज में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ दूसरी पारी में वह रन आउट हुए थे.
कई बार दे चुके हैं उबरने का भरोसा
अब 35 साल के हो चुके रूट ने लॉर्ड्स में पाकिस्तान पर जीत के बाद कहा कि मेरे 14,000 रन बनाने और इस लेवल पर लगभग 15 साल तक खेलने के पीछे एक वजह है. बेशक, यह निराशाजनक है कि एक तरह का ट्रेंड बन गया है. शायद इसमें चार बार अंपायर का फ़ैसला (अंपायर्स कॉल) शामिल है, जो दूसरी तरफ़ भी जा सकता था. गेंद शायद पहले से कहीं ज़्यादा घूम रही है. आप असलियत को समझने और यह जानने की कोशिश करते हैं कि चीज़ें कहां हैं, लेकिन साथ ही आपको यह भी पता होना चाहिए कि बेहतर होते रहने के लिए क्या करना है. मुझे पूरा भरोसा है कि मैं इससे उबर जाऊंगा. मुझे इसकी ज़्यादा चिंता नहीं है.
रूट के करीबी लोग जानते हैं कि यह सोचना भी मुश्किल है कि वह इस हफ़्ते मिले कुछ दिनों की छुट्टी का इस्तेमाल अपने स्टांस में और सीधा खड़े होने और अपने सामने वाले पैर को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर स्टंप्स की तरफ़ ज़्यादा रखने की प्रैक्टिस करने में नहीं करेंगे. आख़िरकार, उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 50 से ज़्यादा का औसत बनाए रखा है क्योंकि वह खेल की मुश्किलों को सुलझाने वाले बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक रहे हैं.
शुरुआत में तो वह गेंद तक ही नहीं पहुंच पाते थे
बैटिंग गुरु केविन शार्प का कहना है कि शुरुआती दिनों में उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी यह थी कि वह गेंद तक ठीक से नहीं पहुंच पाते थे और गेंद बल्ले के किनारे से लगकर विकेटकीपर या स्लिप में चली जाती थी, इसलिए सामने वाले पैर को हवा में रखने से उन्हें जल्दी से पिछले पैर पर आने और फिर आगे बढ़ने में मदद मिली. रूट का LBW का मुद्दा एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है. यह गर्मी का मौसम ओली रॉबिन्सन जैसे कुशल गेंदबाज़ों के दबदबे वाला रहा है. इस वजह से विकेटकीपर स्टंप्स के पास खड़े होने लगे हैं, जिससे बल्लेबाज़ों के लिए इतना आगे बढ़कर लाइन से बाहर निकलने के मौके कम हो गए हैं. इस घरेलू इंटरनेशनल समर में LBW से आउट होने के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है, 2021-25 की तुलना में 2026 में इनकी संख्या में 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.