गोल्डकोस्टः कॉमनवेल्थ में भारत को तीसरा सोना दिलाने वाले सतीश शिवलिंगम का जीवन संघर्षों की कहानी है. तमिलनाडु के वेल्लौर में जन्मे सतीश शिवलिंगम के पिता खुद एक वेटलिफ्टर रहे हैं. उनके पिता ने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता है. हालांकि इसके बाद परिवार के जीवन यापन के लिए सतीश के पिता को एक विश्वविधालय में सिक्योरिटी गॉर्ड की नौकरी करनी पड़ी. सतीश को उनके पिता ने ही शुरुआती ट्रेनिंग दी थी. वह पढ़ाई के साथ-साथ वेटलिफ्टिंग भी करते थे.

आपको बता दैं कि सतीश फिलहाल चेन्नई में साउथर्न रेलवे में क्लर्क है. वह हमेशा से खिलाड़ियों के हित का मुद्दा उठाते रहे हैं. उन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों में ज़्यादातर खिलाड़ियों के साथ फीज़ियो न होने के मुद्दे को उठाया था. सतीश ने इससे पहले इससे पहले साल 2014 के ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. उन्होंने आज भी शानदार प्रदर्शन कर अपने मेडल को बरकरार रखा. पोडियम पर गोल्ड मेडल पाने के बाद सतीश की आंखों में आंसू ही उनके खुशी और संतुष्टि को बयां कर रहे था.

आपको बता दें कि कॉमनवेल्थ खेलों के तीसरे दिन भारत की फिर से सुनहरी शुरुआत हुई. वेटलिफ्टिंग के 77 किलोग्राम भारवर्ग में भारत के वेटलिफ्टर सतीश शिवलिंगम ने स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने  कुल 317 किलोग्राम का वजन उठाकर यह मेडल अपने नाम किया. सतीश ने स्नैच में 144 और क्लीन एंड जर्क में 173 किलोग्राम का वजन उठाया और सोना अपने नाम कर लिया. यह लगातार तीसरा दिन है जब किसी वेटलिफ्टर ने भारत के लिए सोना जीता हो.

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