नई दिल्ली.  भारतीय क्रिकेट टीम के खब्बू बल्लेबाज सुरेश रैना आज अपना 33वां जन्मदिन मना रहे हैं. बांए हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना के ताबड़तोड़ छक्के और मैदान पर चीते सी फुर्ती के साथ गेंद पर झपटना क्रिकेट फैन्स बहुत दिनों से मिस कर रहे हैं. सुरेश रैना लंबे से टीम इंडिया से बाहर हैं और कैप्टन विराट कोहली और हेड कोच रवि शास्त्री की प्लानिंग का हिस्सा भी नहीं लगते. अब जब t20i वर्ल्डकप में एक साल से भी कम वक्त बचा है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बीसीसीआई प्रेसीडेंट सौरव गांगुली के नेतृत्व में सुरेश रैना की टीम में वापसी भी हो सकती है.

T20 के चैंपियन बल्लेबाज सुरेश रैना की अनदेखी वर्ल्डकप में टीम इंडिया को पड़ेगी भारी?

सुरेश रैना को कोई फॉर्मेट अगर सबसे ज्यादा सूट करता है तो वो है टी20. जब मन हो तब सुरेश रैना छक्के मार सकते हैं. युवराज सिंह के बाद सुरेश रैना ही क्लीन छक्के के लिए टीम इंडिया में मशहूर थे. रैना ने 78 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 1604 रन बनाए हैं. जिसमें एक सेंचुरी और पांच अर्धशतक हैं. रैना की स्ट्राइक रेट 135 के आसपास है जो कि काफी शानदार है. सुरेश रैना का अनुभव, मुश्किल परिस्थितियों में मैच खत्म करने का हुनर टीम इंडिया के लिए बेहद जरूरी है. 

जिस तरह की टीम सेलेक्शन की गलतियां 2019 वनडे वर्ल्डकप में हुईं वैसी टी20 वर्ल्डकप में नहीं होनी चाहिए. रैना की उम्र भी है, फिटनेस भी और अनुभव भी. भारत के पास इस वक्त कोई भरोसेमंद फिनिशर नहीं है. ऐसे में सुरेश रैना का टीम से बाहर होना और भारत का टी20 मुकाबलों में लगातार खराब होता रिकॉर्ड आश्चर्य का विषय है. उम्मीद है बर्थडे ब्वॉय सुरेश रैना जल्द ही टीम इंडिया की नीली जर्सी में दोबारा मैदान पर नजर आएंगे.

महेंद्र सिंह धोनी के सेनापती सुरेश रैना थे 2011 वर्ल्डकप के गुमनाम हीरो!

2011 वर्ल्डकप याद किया जाता है युवराज सिंह के बेमिसाल ऑलराउंड प्रदर्शन की वजह से, सचिन तेंदुलकर के आखिरी वर्ल्डकप के रूप में या महेंद्र सिंह धोनी के फाइनल में मैच विनिंग छक्के की वजह से. लेकिन इस वर्ल्डकप में भारत के दो सबसे अहम मुकाबलों में सुरेश रैना टीम के संकटमोचक साबित हुए. लीग मुकाबलों के बाद बारी थी नॉकआउट मुकाबलों की. क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल. वर्ल्डकप का सपना साकार करने के लिए इन तीनों मुकाबलों में इंच भर भी गलती की गुंजाइश नहीं थी. 

2011 वर्ल्ड कप क्वार्टरफाइनल: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया- जब मुश्किल में हो भारत तो रैना है ना!

2011 वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में भारत के सामने थी वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया. रिकी पोंटिंग के शतक की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में 260 रनों का स्कोर खड़ा किया. भारत ने 38वें ओवर में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का विकेट गंवा दिया. सारे भारतीय क्रिकेट फैन्स को 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल याद आने लगा जब ऑस्ट्रेलिया ने सौरव गांगुली का विश्वकप जीतने का सपना हमेशा के लिए तोड़ दिया था. लेकिन ये महेंद्र सिंह धोनी की टीम थी जिनके भरोसेमंद खिलाड़ी सुरेश रैना उनके आउट होने के बाद क्रीज पर आए. भारत को जीत के लिए और 74 रनों की जरूरत थी. वर्ल्ड कप के हीरो युवराज सिंह के साथ सुरेश रैना ने नाबाद साझेदारी कर भारत को वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा दिया. रैना ने 28 गेंदों में 34 रन की पारी खेली. आंकड़ों में यह पारी बेहद छोटी है लेकिन वर्ल्ड कप के लिहाज से देखें तो यह एक बेशकीमती पारी थी.

देखें  भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया क्वार्टरफाइनल 2011 वर्ल्ड कप मैच की हाइलाइट्स

 

वर्ल्डकप के इतिहास का सबसे बड़ा मुकाबला:2011 सेमीफाइनल  भारत बनाम पाकिस्तान- सुरेश रैना न होते तो भारत ये मैच हार जाता!

वर्ल्डकप के इतिहास का सबसे सुपरहिट मुकाबला हुआ चिर प्रतिद्वंदी भारत बनाम पाकिस्तान वर्ल्ड कप सेमीफाइनल 2011. भारत ने पहले बल्लेबाजी की और विरेंद्र सहवाग ताबड़तोड़ शुरुआत करने के बाद जल्द ही पवेलियन लौट गए. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक छोर पर संभलते-फिसलते खेल रहे थे लेकिन दूसरे छोर से विकेटों का पतझड़ लग गया. वहाब रियाज की खतरनाक गेंदों की बदौलत भारत 41वें ओवर में 205 रनों पर अपना छठा विकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के रूप में गंवा चुका था.

क्रीज पर सुरेश रैना और हरभजन सिंह थे. न युवराज थे न धोनी रैना को इस मैच में फिनिशर नहीं एंकर की भूमिका निभानी थी. रैना ने 39 गेंदों पर 36 रनों की बेशकीमती पारी खेली और नाबाद रहे. भारत ने 50 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 260 रन बनाए. रैना इस मैच में कितना संभलकर खेले इसका अंदाजा इसी बात से लगाइए कि सिक्सर किंग सुरेश रैना ने इस मैच में एक भी छक्का नहीं लगाया. हाई प्रेशर मैच में 260 रन काफी थे जहीर खान की अगुवाई में भारतीय बॉलर्स के लिए. पाकिस्तान 231 रनों पर ऑलआउट हो गया और भारत 29 रनों से जीतकर वर्ल्डकप के फाइनल में पहुंच गया. वहां महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर के करिश्मे से भारत 1983 के बाद दूसरी बार वर्ल्डकप जीतने में कामयाब हो पाया.

कमाल के फील्डर हैं सुरेश रैना, देखें उनके कुछ हैरतअंगेज कैच

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