BCCI Pension Scheme: भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुके खिलाड़ी संन्यास लेने के बाद भी अच्छी कमाई करते हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा पूर्व खिलाड़ियों को पेंशन दी जाती है. एमएस धोनी से लेकर सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों को बीसीसीआई से हर महीने पेंशन मिलती है. शुरुआत में सिर्फ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को ही पेंशन मिलती थी, लेकिन अब फर्स्ट क्लास क्रिकेटरों को भी पेंशन दी जाती है. बीसीसीआई के पेंशन स्कीम के तहत खिलाड़ियों को अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से पेंशन मिलती है. इसके तहत सबसे ज्यादा पेंशन टेस्ट क्रिकेटर्स को दी जाती है, जबकि सबसे कम घरेलू खिलाड़ियों को मिलता है. समझिए बीसीसीआई का पूरा पेंशन सिस्टम…
BCCI की पेंशन स्कीम
साल 2022 में BCCI ने पेंशन के बढ़ोतरी के समय 5 अलग-अलग कैटेगरी की पेंशन के बारे में बताया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके पूर्व क्रिकेटरों को हर महीने बोर्ड की ओर से माह पेंशन योजना के तहत 30,000 रुपये मिलते हैं. इसके अलावा साल 2003 से पहले के रिटायर हुए फर्स्ट क्लास पुरुष और महिला खिलाड़ियों को हर महीने 45,000 रुपये मिलते हैं. वहीं, जो महिला खिलाड़ियों ने इंटरनेशनल क्रिकेट पर खेल चुकी हैं, उन्हें बोर्ड की ओर से हर महीने 52,500 की धनराशि दी जाती है.
टेस्ट क्रिकेटर्स को सबसे ज्यादा पैसा
भारतीय टीम के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर्स को 60,000 हजार रुपये हर महीने पेंशन के तौर पर दी जाती है. वहीं, जो खिलाड़ी भारत के लिए 25 या उससे ज्यादा टेस्ट मैच खेल चुके हैं, उन्हें 70,000 रुपये हर महीने दिए जाते हैं. इतना ही नहीं, घरेलू क्रिकेट में कम से कम 10 फर्स्ट क्लास मैच खेलने वाले पूर्व क्रिकेटरों को बोर्ड की तरफ से 10 लाख रुपये तक का मेडिकल रिम्बर्समेंट मिलता है.
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कब से पेंशन दे रहा BCCI?
बीसीसीआई दुनिया का ऐसा क्रिकेट बोर्ड है, जो अपने खिलाड़ियों को रिटायर होने के बाद भी पेंशन देती है. बीसीसीआई साल 2004 से ही अपने रिटायर खिलाड़ियों को पेंशन दे रहा है. बता दें कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे क्रिकेट बोर्ड भी अपने रिटायर्ड खिलाड़ियों को पेंशन नहीं देते हैं.