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RTI के दायरे से बाहर हुआ BCCI, 8 साल पुराने फैसले में बदलाव, क्या होगा इसका असर?

BCCI Outside RTI Scope: केंद्रीय सूचना आयोग ने 8 साल पुराने फैसले को बदलते हुए बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर कर दिया है. अब कोई भी संस्था या आम आदमी आरटीआई दाखिल करके बीसीसीआई से जुड़ी जानकारी नहीं मांग सकती है.

By: Ankush Upadhayay | Published: May 18, 2026 3:28:48 PM IST



BCCI Outside RTI Scope: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने ऐतिहासिक फैसले सुनाते हुए कहा कि बीसीसीआई सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे में नहीं आएगा. इसे आरटीआई एक्ट के तहत ‘लोक प्राधिकरण’ नहीं माना जाएगा. इसका मतलब है कि बीसीसीआई आरटीआई के तहत सूचना देने के लिए बाध्य नहीं होगी. सूचना आयुक्त पी. आर रमेश के इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को RTI के तहत अनिवार्य रूप से सूचना देने से छूट मिल गई है.

इससे पहले साल 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने बीसीसीआई को एक लोक प्राधिकरण यानी पब्लिक अथॉरिटी घोषित किया था. साथ ही बीसीसीआई को सूचना अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद बीसीसीआई ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

8 साल बाद बदला फैसला

साल 2018 में केंद्रीय सूचना आयुक्त ने बीसीसीआई को सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाने का फैसला लिया था. इसमें कहा गया कि बीसीसीआई एक पब्लिक अथॉरिटी है. बोर्ड ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी. बीसीसीआई का कहना है कि वो एक प्राइवेट संस्था है. इसके चलते बोर्ड ने CIC के फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मद्रास हाई कोर्ट ने पिछले साल इस मामले को CIC के पास भेज दिया था.

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साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को देखते हुए इस मामले पर नए सिरे से विचार किया जाए. इसके बाद आज (18 मई) को इस मामले पर आखिरी फैसला सामने आया है. सूचना आयुक्त ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बीसीसीआई आरटीआई एक्ट की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं है. इस फैसले के आने के बाद कोई भी शख्स या संस्था आरटीआई दाखिल करते बीसीसीआई के आंतरिक वित्तीय लेनदेन, पोस्टिंग या फैसलों को लेकर जानकारी नहीं मांग सकता है.

सरकार के कंट्रोल में नहीं BCCI

केंद्रीय सूचना आयोग ने पाया कि बीसीसीआई पर सरकार को कोई सीधा कंट्रोल नहीं है. इसी तरह बोर्ड मीडिया राइट्स, टिकट बिक्री से रेवेन्यू जेनरेट करता है. CIC ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली टैक्स छूट या अन्य कानूनी रियायतों को ‘पर्याप्त वित्तपोषण’ नहीं माना जाएगा. ऐसे में बोर्ड वित्तीय रूप से भी पूरी तरह स्वतंत्र है. आयोग ने माना कि अक्सर सरकारी नियंत्रण के बाद संस्थाएं अच्छी चलती हैं, लेकिन बीसीसीआई के मामले में ऐसा नहीं है. आज के समय बीसीसीआई के चलते भारत दुनिया के क्रिकेट का सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र बन चुका है.

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