जिस तरह से इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी वनडे और टेस्ट टीम घोषित की है, उससे साफ ज़ाहिर है कि उसने ऑस्ट्रेलिया को काफी गम्भीरता से लिया है जबकि उसकी पाकिस्तान के खिलाफ टीम को देखकर यही लगता है कि उसने पाकिस्तान को न सिर्फ हल्के से लिया बल्कि भविष्य की टीम को तैयार करने के मकसद से खिलाड़ियों का चयन किया लेकिन इस टीम ने भी पाकिस्तान को परेशान कर दिया, लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ व्हाइट बॉल क्रिकेट के मुक़ाबलों में टीम चयन में काफी सावधानी बरती गई है।

अब बटलर को टी-20 और वनडे टीम में जगह देकर इंग्लैंड के चयनकर्ताओं ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट के उनके शानदार प्रदर्शन का ईनाम दिया है। जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड जैसे तेज़ गेंदबाज़ भी दोनों टीमों में जगह बनाने में कामयाब हो गए। बैटिंग मज़बूत करने के लिए करन बंधुओं को दोनों टीमों में जगह दी गई है। टेस्ट में बटलर के साथ मैच विनिंग पारी खेलने वाले क्रिस वोक्स को वनडे टीम में जगह दी गई है। वहीं साकिब महमूद, डेविड विली और लुइस ग्रेगरी जैसे तेज़ गेंदबाज़ों को टीम से बाहर कर दिया गया है। इसीसे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इंग्लैंड की टीम में कितना टैलंट है और शायद लॉक़डाउन में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने एक ही समय में टेस्ट और टी-20 खेलने की जो बात कही थी, उस बात में वाकई दम है क्योंकि वह एक ही समय में दोनों टीमें उतारकर दोनों में जीत की उम्मीद कर सकती है।  

इंग्लैंड की सबसे मज़बूत ताक़त उसकी बल्लेबाज़ी है। सच तो यह है कि व्हाइटबॉल क्रिकेट में यही पक्ष विपक्षी टीम के बीच का बड़ा अंतर साबित होता है। उसके शीर्ष छह बल्लेबाज़ों का स्ट्राइक रेट टी-20 में दुनिया के नम्बर एक बल्लेबाज़ बाबर आज़म से भी बेहतर है। ज़ाहिर है कि अब पाकिस्तान को बाबर आज़म के ढोल पीटने के बजाय उनके स्ट्राइक रेट और मैच विनिंग रुख पर विश्लेषण करना चाहिए। अगर बाबर इसी तरह खेलते रहे तो वह सबसे छोटे फॉर्मेट में वाहवाही तो बटोर सकते हैं लेकिन मैच नहीं जिता सकते।

खैर, बात यहां इंग्लैंड की हो रही है, जिससे आज तमाम टीमों को सीखने की ज़रूरत है। आज अगर पाकिस्तान अपने उभरते खिलाड़ियों को खिलाने का जोखिम नहीं उठा पाता तो वहीं इंग्लैंड डेविड मालान से लेकर टेस्ट क्रिकेट में क्राले के रूप में युवा चेहरों के दम पर मैच जीतने का दमखम रखता है। इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम चुनते हुए इस बात की भी परवाह नहीं की कि उसकी टीम में तीन-तीन विकेटकीपर शामिल किए गए हैं। अब जॉनी बेयरस्टो बतौर ओपनर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें किस आधार पर बाहर किया जा सकता है। सैम बिलिंग्स अगर हाल में आयरलैंड के खिलाफ बेहतरीन बल्लेबाज़ी का परिचय दे रहे हैं तो उन्हें टीम में कई विकेटकीपर होने के आधार पर कैसे बाहर किया जा सकता है। क्या श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें एक साथ इतने खिलाड़ियों को अवसर देकर अपने पेशेवर रुख का परिचय दे पाएगी। इंग्लैंड के चयनकर्ताओं ने तो भविष्य के सितारे कहे जा रहे स्पीडस्टर डेविड विली को बाहर का रास्ता दिखाने में भी कोई कोताही नहीं बरती जबकि इन्हीं साकिब के लिए यह कहा जा रहा था कि उनकी स्विंग, स्पीड और सीम मूवमेंट आज के दौर में अपनी अलग पहचान रखती है। गनीमत है कि जो रूट का नाम वनडे टीम में है। अगर वह हाल के टेस्ट के औसत दर्जे के प्रदर्शन की तरह ही खेलते रहे तो मुमकिन है कि उनकी जगह वनडे से भी चली जाए।

पहले इंग्लैंड और वेस्टइंडीज़, फिर इंग्लैंड और पाकिस्तान और चार सितम्बर से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की सीरीज़। वास्तव में इंग्लैंड की मेजबानी में इन तीनों सीरीज़ों ने दुनिया भर के क्रिकेट को रोमांच का आगोश में ले लिया है।

(मनोज जोशी वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं)

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