साउथैम्प्टन में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच टी-20 सीरीज़ का आगाज़ हो रहा है। इसके बाद तीन मैचों की वनडे सीरीज़ होगी। इस सीरीज़ में क्रिकेट का रोमांच अपने शवाब पर होगा क्योंकि विश्व क्रिकेट की दो धुरंधर टीमें आमने सामने होंगी। इस बार इंग्लैंड को दो फायदे हैं। पहला ये कि इस टीम को पिछली दो सीरीज़ की तरह अपनी होम कंडीशंस में खेलने का लाभ मिल सकता है क्योंकि ये टीम हाल में वेस्टइंडीज़ और पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज़ खेल चुकी है। उसके खिलाड़ियों ने इस दौरान अपनी फिटनेस भी साबित की है। उसके सभी खिलाड़ी मैच फिट हैं।

इन मैचों में दोनों टीमों की तेज़ गेंदबाज़ी पर सबकी नज़र रहेगी। वैसे दोनों टीमों ने उन तेज़ गेंदबाज़ों पर ज़्यादा भरोसा किया है जो तीनों फॉर्मेट खेलते हैं। इंग्लैंड ने मार्क वुड और जोफ्रा आर्चर को टीम में जगह दी है। टेस्ट में आम तौर पर दोनों में से किसी एक को खिलाया जाता है लेकिन टी-20 मैच में दोनों अपनी टीम के बड़े एसेट साबित हो सकते हैं। वुड के पास अच्छी स्पीड है जबकि जोफ्रा आर्चर के पास स्पीड के साथ अच्छा उछाल भी है। अगर दोनों अपने अटैकिंग रुख से जल्दी विकेट चटकाकर दे देते हैं तो टीम का काम काफी आसान हो जाएगा। वहीं Curran बंधु सपोर्टिंग रोल में होंगे। बाकी इंग्लैंड के पास Chris Jordan के रूप में टी-20 का विशेषज्ञ गेंदबाज़ भी मौजूद है जिन्होंने हाल में पाकिस्तान के खिलाफ भी अच्छी गेंदबाज़ी की है।

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी ज़्यादा प्रयोग करने से परहेज किया है। उसने टीम में पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोस हैज़लवुड को टीम में शामिल किया है। तीनों टेस्ट के विशेषज्ञ गेंदबाज़ हैं। अब टेस्ट के विशेषज्ञ गेंदबाज़ों को टी-20 में खेलते देखना अच्छा लगेगा लेकिन हैज़लवुड को हो सकता है कि प्लेइंग इलेवन में जगह न मिले। सम्भव है कि उनकी गेंदबाज़ी इंग्लैंड की कंडीशंस के ज़्यादा अनुकूल है। वह गेंद को सीम और स्विंग दोनों करते हैं लेकिन इस फॉर्मेट में उनकी जैसे गेंदबाज़ की धुनाई होने से उसका असर उनके खेल पर पड़ सकता है। वहीं पैट कमिंस आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नम्बर एक गेंदबाज़ हैं। हालांकि वह गेंद को आम तौर पर स्विंग नहीं कराते। उनका ज़ोर कटर पर ज़्यादा रहता है। वह गेंद को विकेट पर हिट करते हैं। उनकी गेंदबाज़ी की सबसे अच्छी बात यह है कि अच्छी स्पीड होने के बावजूद उनमें कंट्रोल काफी अच्छा है। वहीं मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया के मुख्य तेज़ गेंदबाज़ हैं। उनकी स्विंग गेंदें इंग्लैंड की कंडीशंस में काफी कारगर साबित हो सकती हैं। मिचेल के पास रॉ पेस है
और वह 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाज़ी कर चुके हैं और उन्होने पिछले दिनों इसी रफ्तार से फिर गेंदबाज़ी करने का दावा किया है। उनकी यॉर्कर गेंदें भी खतरनाक होती हैं। अपनी इन्हीं दोनों खूबियों की वजह से वह इस सीरीज़ में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।

जिस तरह भारत में कभी जसप्रीत बुमराह सीमित ओवर क्रिकेट में गेंदबाज़ी किया करते थे और देखते ही देखते वह कम्पलीट बॉलर बन गए और तीनों फॉर्मेट में वह भारत के एक अचूक हथियार साबित हुए। यही स्थिति कमिंस और मिचेल स्टार्क की भी है। यह देखकर अच्छा लगा कि दोनों टीमें ज़्यादा प्रयोगों  से बची है और दोनों ने अपने दिग्गजों पर भरोसा दिखाया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ये सीरीज़ बेहद रोमांचक साबित होगी।

(लेखक टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ होने के अलावा क्रिकेट समीक्षक हैं)

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