Atul Wasan Exclusive: बेशक टीम इंडिया चेन्नई में खेले जा रहे दूसरे क्रिकेट टेस्ट को आसानी से जीत लेगी लेकिन ये मैच खराब पिच के लिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि इस मैच की पिच कई तरह के सवालों के घेरे में है. आईसीसी ज़रूर इस पर नोटिस करेगी और इस पर कार्रवाई भी कर सकती है. हर कोई टीम घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाती है और उठाया भी जाना चाहिए लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप नियमों को ही ताक पर रख दें.

आईसीसी इस कदम के लिए भारत को दंडित कर सकती है. इस पिच पर मैच के पहले ही दिन लंच से पहले पिच ने अपना करतब दिखाना शुरू कर दिया था. इस दौरान पिच उसी तरह घूम रही थी जैसे कि भारतीय उप महाद्वीप में मैच के तीसरे दिन घूमती है. अगर पिच बनाने के बाद उस पर पानी नहीं दिया जाएगा या फिर इसे रोल नहीं किया जाएगा तो फिर ऐसी ही पिच बनेगी, जिस पर हर कोई उंगली उठाएगा. अगर पिच पर पहले ही दिन गेंद के टिप्पा पड़ते ही मिट्टी उड़ने लगे तो उसे क्या कहेंगे आप. आपको याद होगा कि 2008 में आईसीसी ने कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम पर कुछ समय के लिए बैन लगा दिया था. तब हमने साउथ अफ्रीका से एक खराब पिच पर मैच जीता था. अगर आप थोड़ा बहुत विकेट से लाभ लेते हैं तो बात समझ में आती है लेकिन जिस पिच पर पहले ही दिन रन बनाना मुश्किल हो तो ऐसी विकेट का बचाव कतई नहीं किया जा सकता. सच तो यह है कि इस मैच की पिच तैयार ही नहीं थी. मै तो यहां तक कहूंगा कि अगर इंग्लैंड पर फॉलोऑन की नौबत आती तो निश्चय ही यह मैच तीन दिन में खत्म हो गया होता.

पहले टेस्ट में हम टॉस हार गए और इंग्लैंड की टीम उस पिच पर 600 रन बनाने में सफल हो गई. इतने रनों की उम्मीद भारत में किसी ने नहीं की होगी. जो रूट ने उस पिच पर डबल सेंचुरी ठोक दी. वहीं हमारी बल्लेबाज़ी पहली पारी में ही एक्सपोज़ हो गई. जेम्स एंडरसन, जोफ्रा आर्चर और दोनों स्पिनरों के सामने भारतीय बल्लेबाज़ी ढह गई. मैं तो इंग्लैंड के सिस्टम की तारीफ करूंगा जिसने पहले टेस्ट के मैच विनर एंडरसन को ही दूसरे टेस्ट में बाहर बिठा दिया. इस तरह के तर्क का कोई मतलब नहीं है कि इंग्लैंड को भारतीय दौरे से पहले श्रीलंका में खेलने से लाभ हुआ और भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया में खेलने से अपनी कंडीशंस में मुश्किलें हुई, मै इन बातों से सहमत नहीं हूं.

आज क्रिकेट इतना ज़्यादा हो रहा है कि बिना रोटेशन के आप अपने खिलाड़ियों को इंजर्ड होने से नहीं बचा सकते. पहले रोहित शर्मा की जुझारू पारी और फिर आर अश्विन के गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन ने सबका दिल जीत लिया. दरअसल अश्विन को पांच विकेट चटकाने से इतना कॉन्फिडेंस मिला कि उन्होंने बिना किसी दबाव के खुलकर स्ट्रोक खेले और अपनी ऑलराउंड क्षमताओं का परिचय दिया. वहीं विराट कोहली से हर कोई हमेशा सेंचुरी की उम्मीद करता है लेकिन यहां दूसरी पारी में उनकी पारी किसी सेंचुरी से कम नहीं थी. टर्निंग ट्रैक पर उनकी यह पारी गज़ब की थी, जिसे वास्तव में शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.

इस टेस्ट के बाद भारत का अगला इम्तिहान पिंक बॉल क्रिकेट में है. बेशक इस तरह का क्रिकेट तेज़ गेंदबाज़ों के लिए मददगार रहता है लेकिन इसके बावजूद मुझे नहीं लगता कि भारत उस मैच में तीन तेंज़ गेंदबाज़ों के साथ उतरेगा. हार्दिक पांड्या अगर पूरी तरह फिट हो जाते हैं और उन्हें अवसर मिलता है तो बात अलग है. भारत में हमने देखा है कि ग्रीन टॉप विकेट पर भी दो ही तेज़ गेंदबाज़ खिलाए जाते हैं.

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