नई दिल्लीः इंडोनेशिया के दो बड़े शहर जकार्ता और पालेमबांग एशियाई खेलों की मेजबानी के लिए तैयार हैं. इसके साथ ही एशिया के तमाम एथलीट इस प्रतियोगिता में पदक जीतने के लिए कमर कस रहे हैं. भारत की डिस्कस थ्रो (चक्का फेंक) एथलीट सीमा पूनिया भी मेडल के लिए मैदान में उतरेंगी. उन पर गोल्ड मेडल जीतने का दबाव होगा क्योंकि 2014 में इंच्योन में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. इसलिए उन पर फिर से उस प्रदर्शन को दोहराने का दबाव होगा. वैसे भी कृष्णा पूनिया के संन्यास लेने के बाद डिस्कस थ्रो की सारी उम्मीदें सीमा पर ही टिकी हुई हैं.

हालांकि सीमा की उम्र इसमें आड़े हाथ आ सकती है क्योंकि वह लगभग 35 साल की हो चुकी हैं. लेकिन वह इस बार भी बेहतर प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त हैं. बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी फॉर्म लगातार बरकरार है. यही कारण है कि अभी कुछ महीने पहले ही उन्होंने गोल्ड कोस्ट के कॉमनवेल्थ खेलों में सिल्वर मेडल जीता था. सीमा 2006 से 2018 तक लगातार चार बार कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीत चुकी हैं. 2010 में उन्होंने ब्रॉन्ज तो 2006, 2014 और 2018 में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था.

कॉमनवेल्थ खेलों के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेती रहती हैं. वह 2004 से ओलंपिक में भी लगातार भाग लेती आ रही है. सिर्फ 2008 बीजिंग ओलंपिक को छोड़कर उन्होंने हर ओलंपिक में भाग लिया है और भविष्य में उनकी नजरें 2020 टोक्यो ओलंपिक पर लगी हैं. हालांकि एशियन गेम्स का अनुभव उनके पास अपेक्षाकृत कम ही है. उन्होंने सिर्फ एक बार 2014 में ही एशियन खेलों में भाग लिया था, तब उन्होंने सोना झटका था. भारतीय खेल प्रशंसकों को फिर से उनसे इसी तरह की प्रदर्शन की उम्मीद होगी.

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