नई दिल्ली: जकार्ता में 18 अगस्त से शुरू होने वाले एशियन गेम्स 2018 के लिए भारतीय खिलाड़ी कमर कस चुके हैं. इस बार तीरंदाजी में भारत की ओर से 23 वर्षीय रजत चौहान गोल्ड पर निशाना लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. बता दें कि कोपेनहेगन में आयोजित विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में रजत चौहान ने भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता है. लेकिन अब वो एशियन गेम्स के लिए तैयार है. इसके अलावा रजत चौहान गत एशियाी खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था.

इसके साथ-साथ साल 2005 में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में रजत चौहान सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुके हैं. कंपाउंड वर्ग के मुकाबले में चौहान को डेनमार्क के स्टीफेन हैंसेंन के हाथों फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था. यह मुकाबला काफी करीबी 143-147 का रहा था. इसके बाद भी रजत चौहान विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से व्यक्तिगत मेडल जीतने के मामले में पहले भारतीय बने.इसके साथ-साथ साल 2014 में साउथ कोरिया के इंचिओन में आयोजित एशियन गेम्स में रजत चौहान ने गोल्ड मेडल जीता था.

रजत चौहान की उपलब्धि और फैमिली बैकग्राउंड:
रजत चौहान का जन्म 30 दिसंबर 1994 को हुआ. कई अन्य खिलाड़ियों की तरह चौहान को भी काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है. यहां तक कि एक समय में चौहान के बाद तीरंदाजी किट नहीं था. जिसके बाद उनके पिता ताराचंद चौहान ने अपने टाटा इंडिगो कार बेचकर बेटे को तीरंदाजी किट दिलवाया था.
इसके तुरंत बाद ही रजत चौहान ने 2011 में बैंकाक एशिययन ग्रैंड प्रिक्स में गोल्ड मेडल जीता था. रजत चौहान ने कहते हैं कि उनके दिमांग में तीरदांजी को लेकर कोई लगाव नहीं था. जबकि उनका झुकाव तो तायक्वोंडो और अन्य मार्शल आर्ट्स में अधिक था.
बड़े होने के बाद उन्होंने तीरंदाजी को अपना भविष्य चुना और मेडल जीता.वर्ष 2008 में, चौहान को जयपुर, के सवाई मान सिंह स्टेडियम में परीक्षण के लिए चुना गया था और उनके कोच कमलेश शर्मा के मार्गदर्शन में मात्र 16 साल की उम्र में चैंपियन बन गए थे.

अवार्ड: अर्जुन अवार्ड

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