नई दिल्ली. उड़नपरी पीटी ऊषा ने 34 साल बाद अपनी पुरानी यादों को ताजा करते बताया कि कैसे वह 1984 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाईं?  उन्होंने कहा कि खाने के लिए चावल के दलिए और अचार दिए गए थे. इस ओलंपिक में पीटी ऊषा एक सेकंड के सौंवें हिस्से से पदक जीतने से चूक गई थीं. उन्होंने कहा कि पौष्टिक खाने के बगैर उन्हें कांस्य पदक गंवाना पड़ा था. उन्होंने कहा कि गैर पौष्टिक खाने का असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा.

1984 के ओलंपिक खेलों में उड़नपरी के नाम से मशहूर पीटी ऊषा ने 400 मीटर बाधा दौड़ और 4×400 मीटर की रिले दौड़ में भाग लिया था. 400 मीटर की बाधादौड़ के फाइनल में पीटी ऊषा रोमानिया की क्रिस्टियाना कोजोकारू के साथ तीसरे स्थान पर पहुंचने में कामयाब रही थीं. लेकिन निर्णायक लैप में 1 सेकंड के सौंवे हिस्से से पीछे रह गईं और उन्हें चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा. वहीं 4×400 मीटर रिले दौड़ में भी पीटी ऊषा कुछ खास नहीं कर पाईं और वह सातवें स्थान पर रहीं.

पीटी ऊषा ने एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा, हम उन विदेशी खिलाड़ियों से ईर्ष्या करते थे जिनके पास खेल की सारी सुविधाएं थीं, ऊषा ने आगे कहा, हम सोचते थे एक दिन ऐसा आयेगा जब हमें भी विदेशी खिलाड़ियों की तरह सुविधाओं मिलेंगी.

पीटी ऊषा ने 18 साल तक देश का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान उन्होंने कई पदक जीते. उनका सबसे ज्यादा सिक्का एशियन चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में चला. उन्होंने इन दोने प्रतियोगिताओं कुल 18 स्वर्ण पदक जीते और 13 बार रजत पदक जीतने में सफल रहीं. 1985 में इंडोनेशिया में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में पीटी ऊषा ने 5 स्वर्ण पदक जीते थे वहीं इसी प्रतियोगिता में 4×100 मीटर रिले में कांस्य पदक हासिल किया था. 1986 में सियोल में आयोजित एशियाड में पीटी ऊषा ने 4 स्वर्ण पदक झोली में डाले थे.

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