दिल्ली. भारत के स्टार पहलवान सुशील कुमार इंडोनेशिया में आयोजित होने वाले 18वें एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलने के लिए बेताब हैं. ये खेल इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता सहित पालेमबांग में 18 अगस्त से 2 सितंबर के बीच खेले जाएंगे.

कुश्ती में भारत को सुशील कुमार से स्वर्ण पदक की उम्मीद है. सुशील एशियाई खेलों में अभी तक सोने का तमगा जीतने में नाकाम रहे हैं. 2006 दोहा एशियाई खेलों में वह कांस्य पदक जीतने में कामयाब हुए. सुशील ग्वांग्झू और इंचियोन एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाए थे. 66 किग्रा प्रतिस्पर्धा का यह 35 वर्षीय पहलवान एशियाई खेलों में 74 किग्रा प्रतिस्पर्धा में अपनी चुनौती पेश करेगा.

2008 में सुशील कुमार ने बीजिंग ओलंपिक में 66 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने में सफल रहे थे. वहीं 2012 लंदन ओलंपिक में सुशील अपने पदक का रंग बदला. लंदन ओलंपिक में उन्होंने 66 किग्रा वर्ग में रजत पदक हासिल किया था.

2018 में गोल्ड कोस्ट ऑस्ट्रेलिया में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में सुशील कुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया. हाल ही में एशियाई खेलों के बारे में सुशील ने कहा था, मैंने कुश्ती में चार साल बाद वापसी की और ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में राष्ट्रमंडल खेलों में 74 किग्रा में मैंने स्वर्ण पदक जीता था, मैं अभी फार्म में हूं. सुशील एशियाई खेलों के ठीक पहले इन दिनों जार्जिया में जमकर पसीना बहा रहे है.

ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों सहित कई प्रतियोगिता में पदक जीत चुके पहलवान सुशील कुमार का जन्म दिल्ली से सटे नजफगढ़ के बापरोला गांव में हुआ था. सुशील को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2005 में अर्जुन अवार्ड दिया गया. 2009 में उन्हें मैरीकॉम और विजेंद्र सिंह के साथ संयुक्त रूप से राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया. 2011 में भारत सरकार ने सुशील कुमार को पद्मश्री से सम्मानित किया.

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