नई दिल्लीः भारतीय एथलीट दल जब एक-एक करके जकार्ता-पालेमबांग के लिए रवाना हो रही है तो एक गोल्ड मेडल लगभग पहले से ही पक्का माना जा रहा है. यह मेडल कबड्डी में पक्की मानी जा रही है. ऐसा इसलिए है क्योंकि एशियन खेलों में जब से कबड्डी शामिल हुआ है भारतीय पुरूष कबड्डी टीम ने हर बार गोल्ड मेडल जीता है. 1990 में जब यह खेल पहली बार शामिल हुई थी तब से 2014 तक भारत ने लगातार 7 बार गोल्ड मेडल जीता है. इस दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश और ईरान की टीमों ने भारतीय टीम को कई बार टक्कर तो दी है लेकिन कभी भी हरा नहीं सकी है. 

हाल के समय में प्रो कबड्डी लीग शुरू होने के बाद कबड्डी के खेल को देश भर में लोकप्रियता भी मिली है और उनके खिलाड़ियों को पहचाना जाने लगा है. इस लीग के कारण कई नई प्रतिभाओं का उभार भी राष्ट्रीय स्तर पर हुआ है और भारतीय टीम की पुराने खिलाड़ियों पर निर्भरता भी कम हुई है. यही कारण है कि कई अनुभवी खिलाड़ियों के टीम में ना होने के बावजूद टीम अभी भी गोल्ड मेडल की प्रबल दावेदार है. 

अभी इस युवा भारतीय टीम ने दुबई में हुए 6 देशों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का भी खिताब जीता है. इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान और ईरान जैसी मजबूत टीमें शामिल हैं. एशियन गेम्स में कबड्डी के मुकाबले 19 से 23 अगस्त तक खेले जाएंगे. भारतीय टीम इस प्रकार है-

अजय ठाकुर (कप्तान), गिरीश मारुती एर्नाक, मोहित छिल्लर, राजू लाल चौधरी, परदीप नरवाल, राहुल चौधरी,  रिशांक देवाडिगा, मोनू गोयत, रोहित कुमार, गंगाधरी मल्लेश, संदीप नरवाल और दीपक निवास हुड्डा

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