नई दिल्लीः भारत की तीरंंदाजी टीम 2018 के एशियन गेम्स में जब उतरेगी तो उस पर 2014 के प्रदर्शन को दोहराने का दबाव होगा. तब भारतीय टीम ने तीरंदाजी की चारों स्पर्धाओं में पदक जीते थे. 29 साल के अभिषेक वर्मा ने भी तब पुरूषों की कंपाउड स्पर्धा में रजत पदक जीता था. इसके अलावा अभिषेक ने रजत चौहान और संदीप कुमार के साथ मिलकर पुरूष कंपाउड टीम को गोल्ड मेडल दिलाया था. भारतीय टीम ने खिताब के सबसे प्रबल दावेदार दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता था.

इस बार जकार्ता-पालेमबांग में भी अभिषेक वह प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेंगे. टीम और व्यक्तिगत दोनों स्पर्धाओं में भारत को उनसे पदक की उम्मीदें हैं. आपको बता दें कि वर्मा का प्रदर्शन हाल-फिलहाल में ठीक-ठाक रहा है. उन्होंने इस साल साल्ट लेक विश्व कप में सिल्वर मेडल जीता था. हालांकि उनके पास यहां गोल्ड मे़डल जीतने का भी मौका था. सेमीफाइनल में अभिषेक ने परफेक्ट 150 का स्कोर बनाया था. लेकिन फाइनल में वह इस फॉर्म को जारी नहीं रख पाए.

देखा जाए तो वर्मा का पूरा कैरियर ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. वर्तमान समय में विश्व रैंकिंग में 7वां स्थान रखने वाले अभिषेक ने रोक्लॉ विश्व कप तीरंदाजी, 2015 में गोल्ड मेडल जीता था, जबकि उसी साल मेक्सिको विश्व कप फाइनल में उन्हें सिल्वर से ही संतोष करना पड़ा था. खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि अभिषेक वर्मा इस एशियाई खेलों में फिर से अपनी फॉर्म को वापस पा लेंगे और टीम व व्यक्तिगत दोनों स्पर्धाओं में भारत को गोल्ड मेडल दिलाएंगे.

एशियन गेम्स 2018ः 2014 की गोल्डेन कामयाबी दोहराने उतरेंगी डिस्कस थ्रोअर सीमा पूनिया 

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