Amit Panghal Interview: वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर और एशियाई खेलों का गोल्ड….हम बात कर रहे हैं जाने माने मुक्केबाज़ अमित पंघाल की. उन्होंने आज समाज को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि कोविड-19 की वजह से हुए लॉकडाउन के दौरान वह अपने घर रोहतक में रहे और उन्होंने अपने कोच की देखरेख में अभ्यास किया. उन्होंने प्रैक्टिस नहीं छोड़ी जिससे उन्हें लय में रहने में मदद मिली. इन दिनों वह एनआईएस, पटियाला में अपनी तैयारियों को अंजाम देने में जुटे हुए हैं. उनका लक्ष्य टोक्यो में अगले साल पदक जीतना है. उनका कहना है कि इस समय वह अपनी पूरी लय में हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

अमित ने कहा कि कोच अनिल धनकड़ सर का साथ उन्हें बचपन से मिला है. उन्होंने उनके साथ 12 साल बिताए हैं जो उनके कोच भी हैं और मेंटर भी. 52 किलो को ही चुनने की क्या वजह थी, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पहले उन्होंने 59 किलो वजन में जाने की कोशिश की थी लेकिन यह ओलिम्पिक वजन नहीं था जिससे उन्होंने अपना सारा ध्यान 52 किलो पर केंद्रित किया. उनकी कदकाठी को देखते हुए यह वजह उनके लिए ज़्यादा उपयुक्त साबित हुआ.

अमित ने कहा कि सफलता आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. 11 साल पहले राज्य सब जूनियर चैम्पियनशिप में कांस्य पदक से उनकी शुरुआत थी लेकिन इससे अगली ही प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और फिर राष्ट्रीय स्तर पर इसी क़ामयाबी को दोहराने से उनकी अच्छी खासी हौसला आफज़ाई हुई. 2016 की नैशनल चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतने के बाद तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था.

अमित ने कहा कि जकार्ता में एशियाई खेलों में उनका पाला दुनिया के नम्बर एक खिलाड़ी उज्बेकिस्तान के हसनबाय दुस्मातोव से हुआ, जो रियो ओलिम्पिक के भी स्वर्ण पदक विजेता थे. उन्हें हराकर गोल्ड मेडल जीतने का मज़ा कई गुना बढ़ गया. उन्होंने कहा कि इसी मुक्केबाज़ से वह दो बार हार चुके थे. उनके जम्पिंग लेफ्ट हुक गज़ब के थे. उन्हें खुशी है कि उन्होंने उनकी इस ताक़त का माकूल जवाब दिया. इस दौरान उनकी इन-आउट रणनीति ने भी खूब काम किया. एशियाई चैम्पियनशिप के क्वॉर्टर फाइनल में उनके उस स्कोर में और भी सुधार हुआ.

अमित को इस बात का मलाल है कि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें जीत हासिल नहीं हुई. हालांकि उनका ओवरऑल प्रदर्शन अच्छा रहा लेकिन बार-बार वीडियो देखने के बाद भी उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह परिणाम क्यों आया क्योंकि उनके प्रहार वास्तव में काफी आक्रामक थे. अमित ने ओलिम्पिक क्वॉलिफाइंग के प्रदर्शन के बारे में बताया कि जोर्डन में उन्होंने बहुत सहजता के साथ ओलिम्पिक के लिए क्वॉलीफाई किया, जिसकी उनकी बहुत खुशी .

आज आम तौर पर विदेशी और देसी कोच की बहस छिड़ जाती है, इसके बारे में अमित कहते हैं कि आदर्श स्थिति तो यह है कि दोनों की ही खूबियों का फायदा उठाया जाए. दोनों का मिला जुला मैजिक करिश्मा दिखा सकता है. अमित कहते हैं कि आप टोक्यो में देखिएगा, भारतीय मुक्केबाज़ी दल को तीन से चार पदक हासिल होंगे. अमित ने इंटरव्यू के आखिर में खिलाड़ियों को एक संदेश दिया कि अपना लक्ष्य तय कर लो और उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत करो.

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