भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में हुए बड़े बदलाव को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि जब एमएस धोनी ने टेस्ट क्रिकेट की कप्तानी छोड़ी, तब विराट कोहली और हेड कोच रवि शास्त्री ने टीम की सोच पूरी तरह बदल दी. रहाणे के मुताबिक इस जोड़ी ने खिलाड़ियों के अंदर यह भरोसा पैदा किया कि भारत दुनिया के किसी भी मैदान पर जीत हासिल कर सकता है. आइए जानते हैं कि और रहाणे ने क्या कहा?
रहाणे ने बताया कि विराट और रवि शास्त्री ने सिर्फ अच्छे प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि फिटनेस, अनुशासन और अटैकिंग क्रिकेट पर भी खास जोर दिया. खिलाड़ियों से हर मैच में जीत के इरादे से उतरने की उम्मीद की जाती थी. उनका कहना है कि टीम ने विदेशी दौरों पर सिर्फ मुकाबला करने के बजाय जीत हासिल करने की मानसिकता अपनाई, जिसका फायदा भारतीय क्रिकेट को लंबे समय तक मिला.
विदेशी दौरों पर बदली भारतीय टीम की पहचान
अजिंक्य रहाणे का मानना है कि तेज गेंदबाजों पर भरोसा और आक्रामक रणनीति ने भारतीय टेस्ट टीम को नई पहचान दिलाई. पहले जहां विदेशी परिस्थितियों में ड्रॉ को भी अच्छा नतीजा माना जाता था, वहीं विराट कोहली और रवि शास्त्री के दौर में हर टेस्ट मैच जीतने का लक्ष्य रखा गया. इसी सोच की वजह से भारत ने कई मजबूत टीमों को उनके घर में कड़ी चुनौती दी और यादगार जीत भी दर्ज की.
नई जेनरेशन को बनाए रखना होगा वही जज्बा
रहाणे ने कहा कि भारतीय क्रिकेट को आगे भी उसी जीत वाली मानसिकता को बनाए रखना चाहिए. उनके अनुसार, फिटनेस, अनुशासन और निडर क्रिकेट ही टीम की सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले खिलाड़ी भी इसी सोच के साथ मैदान पर उतरेंगे और भारतीय टेस्ट टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे. रहाणे का मानना है कि यही संस्कृति भारत को लंबे समय तक विश्व क्रिकेट की मजबूत टीम बनाए रख सकती है.