मुंबई. राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स पर दो साल तक लोढ़ा समिति ने पाबंदी तो लगा दी है, लेकिन BCCI फिलहाल समिति के इस फैसले को मानने के लिए तैयार नज़र नहीं आ रहा है. रविवार को एक वर्किंग ग्रुप बनाकर लोढ़ा समिति के फैसले को पढ़ने पर रज़ामंदी तो बनी, लेकिन दोनों टीमों को सज़ा देने पर नहीं.आपको बता दें कि टीमों के हिमायतियों और विरोधियों के बीच जमकर तकरार भी हुई.

लोढ़ा समिति के फैसले पर BCCI में दरार
राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल से हटाने को लेकर BCCI दो धड़ों में बंट गया है. एक धड़ा चाहता है कि लोढ़ा पैनल के फैसले को आगे बढ़ाते हुए दोनों टीमों को लीग से निकाल देना चाहिए, जबकि दूसरे को लगता है कि पाबंदी के सालों में बोर्ड को दोनों टीमों की देख-रेख करनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक बैठक में रवि शास्त्री का सुझाव था कि धोनी को चेन्नई का और द्रविड़ को राजस्थान की कमान दो सालों के लिए सौंप देनी चाहिए, लेकिन पूर्व कोषाध्यक्ष शिर्के ने इस बात का विरोध करते हुए कहा कि धोनी पर मुद्गल पैनल के सामने ग़लतबयानी की ख़बरें मीडिया में आई हैं.

शास्त्री ने दोनों टीमों को बनाए रखने के लिए लीग की वित्तीय स्थिति और खिलाड़ियों का भी हवाला दिया. सूत्रों के मुताबिक बैठक में रवि शास्त्री ने कहा दोनों टीमों को हटाने से लीग और बोर्ड की छवि पर असर पड़ेगा, खिलाड़ियों का भविष्य भी अधर में लटक जाएगा. जवाब में अजय शिर्के का कहना था जब पुणे और कोच्चि का अनुबंध खत्म किया था तब? खिलाड़ी किसी भी टीम से खेल सकते हैं इससे उनके भविष्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

करार की शर्तों के लिए 8 टीमों का होना ज़रूरी 
हालांकि बैठक में सारे सदस्य इस बात पर एकमत थे कि ब्रॉडकॉस्टर के साथ करार की शर्तों को बनाए रखने के लिए लीग में 8 टीमों का होना जरूरी है भले ही इसके लिए 2 नई टीमों, नये टेंडर के जरिये क्यों ना बनाई जाएं. कुछ सदस्यों का ये भी कहना था, कि पाबंदी के बाद जब चेन्नई और राजस्थान लौटेंगे, तो लीग में 10 टीमें भी खेल सकती हैं। लेकिन इस सुझाव का फिर विरोध हुआ.

सवालों के घेरे में खड़े आईपीएल सीओओ सुंदर रमन ने कहा कि 10 टीमों के होने से लीग में 94 मैच कराने होंगे, जो व्यवहारिक नहीं है. जवाब में अजय शिर्के का कहना था कि 2011 में जब आईपीएल में 10 टीमें खेली थीं, तब आपके पास प्रभार था… अब आपका रुख़ क्यों बदल रहा है. बोर्ड के संविधान की धारा 11.3 के तहत दोनों टीमों को बाहर निकालने का विकल्प तो है, लेकिन कोच्चि और पुणे को बाहर करने के बाद वित्तीय और कानूनी लड़ाई को देखते हुए बीसीसीआई हर कदम फूंक-फूंक कर रखना चाहता है.

एजेंसी इनपुट भी

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