रियो. पैरालिंपिक खेलों में देवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक स्पर्धा में अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया है. 62.15 मीटर तक भाला फेंक कर अपने ही 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है. देवेंद्र बचपन में ही एक हाथ गंवा बैठे थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार खेलों में अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं.
 
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देवेंद्र राजस्थान के चुरू जिले से तालुक्क रखते हैं. देवेंद्र जब आठ साल के थे तो पेड़ पर चढ़ने के दौरान बिजली के तार की चपेट में आ गए थे. करंट लगने से हाथ काफी झुलस गया था. बहुत मशक्कतों के बाद भी जब डॉक्टर इलाज करने में नाकाम रहे तो उनका एक हाथ काट देना पड़ा.
 
गोल्ड जीत स्थापित किए कीर्तिमान 
हाथ गंवा देने के बावजूद भी देवेंद्र रूके नहीं. देवेंद्र ने साउथ कोरिया में 2002 FESPIC गेम्स, 2004 एथेंस पैरालिंपिक, 2013 विश्व एथलीटिक्स चैंपियनशिप और अब रियो पैरालिंपिक में गोल्ड जीत कर कीर्तिमान स्थापित किया. वहीं 2014 एशियन गेम्स में रजत पदक भी अपने नाम कर चुके हैं. 
 
2004 में एथेंस पैरालिंपिक में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद उन्हें अर्जुन अवार्ड भी मिला. देवेंद्र देश के पहले पैरालिंपियन हैं जो 2012 में राष्ट्रपति से पद्मश्री से सम्मानित हो चुके हैं.
 
 
भाला फेंक को 2008 और 2012 में हुए पैरालिंपिक खेलों में शामिल नहीं किया गया था. इस कारण से देवेंद्र उन दोनों पैरालिंपिक खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे. 2004 के 12 साल बाद अब 2016 में पैरालिंपिक में गोल्ड हासिल कर देवेंद्र ने परचम लहरा दिया है. इस बार उन्होंने अपने पुराने विश्व रिकॉर्ड 62.15 मीटर को तोड़ नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिया है.