रांची. झारखंड की राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर दूर बसा सिमडेगा जिला अपनी हॉकी के लिए मशहूर है. सिमडेगा के पास अपना एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम है और जिले में ऐसा माहौल है कि मानो आप ऐसे इलाके में हैं जो सिर्फ हॉकी खेलता है, हॉकी जगता है, हॉकी सोता है, हॉकी खाता है और हॉकी पीता है. क्या हॉकी का दीवाना ये शहर भारत को ओलंपिक में हॉकी गोल्ड दिला पाएगा?
 
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सिमडेगा ने भारतीय हॉकी को ओलंपियन माइक किंडो, सिल्वेनस डुंगडुंग के अलावा कांति बा, मसीरा सुरीन, समराई टेटे, जस्टिन केरकेट्टा, विमल लकरा, वीरेंद्र लकरा, एडलिन केरकेट्टा, असुंता लकरा, अलमा गुरिया, पुष्पा टोपनो, जेम्स केरकेट्टा, अश्रिता लकरा जैसे खिलाड़ी दिए हैं. ये वो खिलाड़ी हैं जो अलग-अलग समय में भारतीय हॉकी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर खेलते रहे हैं.
 
2015 में राज्य सरकार ने सिमडेगा को एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम दिया था और जब इसके रखरखाव का सवाल उठा तो उसका खर्च भी उठा लिया. आज की तारीख में सिमडेगा को झारखंड में खेल की नर्सरी कहा जाता है.
 
 
केंद्र सरकार ने हॉकी पर जो डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाई है उसमें भी सिमडेगा का ज़ोर है. सिमडेगा की साक्षरता दर 52 परसेंट के करीब है जो नेशनल एवरेज से काफी कम है. लड़कियों की साक्षरता दर 40 परसेंट से थोड़ा ज्यादा है लेकिन साक्षरता दर के मोर्चे पर पिछड़ता सिमडेगा हॉकी के मैदान पर लड़कियों के प्रदर्शन से बाजी मारता दिखता है.
 
सिमडेगा में हॉकी के अलावा फुटबॉल भी लोकप्रिय है और एक जमाने में फुटबॉल के मैदान पर ही हॉकी की प्रैक्टिस करते-करते 1980 के मॉस्को ओलंपिक तक पहुंचे सिल्वेनस डुंगडुंग कहते हैं, “तमाम चुनौतियों के बावजूद सिमडेगा टैलेंटेड खिलाड़ियों का एक बेहतरीन हब है. एस्ट्रोटर्फ पर बच्चों की ट्रेनिंग शानदार चीज़ है.”
 
 
भाषा की दिक्कत न हो इसके लिए सिमडेगा में खिलाड़ियों को अंग्रेज़ी खास तौर पर पढ़ाई जा रही है. अंग्रेज़ी बोलना सीख रहे आदिवासी बच्चे स्मार्ट बन रहे हैं और स्मार्टनेस के साथ हॉकी की स्टिक भांजते हुए भारत के ओलंपिक सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं.