नई दिल्ली. दीपा करमाकर रियो ओलंपिक में महिला वाल्ट फाइनल्स में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गई और चौथे स्थान पर रहीं. जिसके बाद उन्होंने ट्विट करके देशवासियों से माफी मांगी है. बता दें कि दीपा ने इतिहास रच दिया. यह किसी भी भारतीय जिम्नास्ट का ओलंपिक इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
 
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तेईस वर्षीय दीपा ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिम्नास्ट बनी थी. उन्होंने औसत 15.066 अंक जुटाये जिससे वह स्विट्जरलैंड की कांस्य पदक विजेता गुईलिया स्टेनग्रुबर :15.216 अंक: से महज 0.15 अंक से चूक गई. स्वर्ण पदक अमेरिका की प्रबल दावेदार सिमोन बाइल्स 15.966 अंक: के नाम रहा. 
 
सिमोन बाइल्स ने इस ओलंपिक में टीम स्पर्धा और आल राउंड में भी दो स्वर्ण जीते हैं. मौजूदा वाल्ट विश्व चैम्पियन रूस की मारिया पासेका ने 15.253 के औसत अंक से रजत पदक जीता. दीपा ने क्वालीफाइंग राउंड में 14.850 अंक का स्कोर बनाया था. उसे और अंक मिल सकते थे, लेकिन वह जोखिम भरे ‘प्रोदुनोवा’ वाल्ट में लैंडिंग के वक्त लगभग बैठ ही गयी थी. वह फाइनल्स में छठी प्रतिस्पर्धी के रूप में आयी, त्रिपुरा की इस जिम्नास्ट ने पहले प्रयास में ‘सुकाहारा’ किया जिसमें उसने 14.866 अंक जुटाये. उसने एक्जीक्यूशन में 8.855 अंक हासिल किये.
 
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अपने ‘प्रोदुनोवा’ वाल्ट में दीपा ने सबकुछ सही किया लेकिन वह परफेक्ट लैंडिंग नहीं कर सकीं और उस वक्त वह जमीन पर लगभग बैठ ही गयी जिससे उसके अंक कट गये. प्रोदुनोवा से उसे 15.266 अंक मिले जिसमें सातवें स्तर की मुश्किल में 8.266 अंक एक्जीक्यूशन के लिये मिले. दोनों प्रयासों के औसत से उसके 15.066 अंक रहे जिससे कांस्य पदक विजेता से वह 0.15 अंक से पिछड़ गयी.
 
 
 

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