नई दिल्ली. मौजूदा दौर में यूपी के सबसे बड़े यदुवंशी मुलायम सिंह यादव के सगे छोटे भाई शिवपाल यादव और पुत्र अखिलेश यादव के बीच संगठन और सरकार पर वर्चस्व का ये महाभारत पूरे हफ्ते सुर्खियों में रहा. घर के अंदर अखिलेश और शिवपाल के बीच समझौते की कोशिशें चलती रहीं, तो बाहर सड़क पर दोनों के समर्थकों की खेमेबंदी खुलेआम होती रही. 
 
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कभी शिवपाल यादव के समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया, तो कभी अखिलेश यादव के और ये दौर तब भी नहीं थमा, जब खुद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव सामने आकर ऐलान कर चुके थे कि परिवार और पार्टी में कोई विवाद नहीं है, सब ठीक-ठाक है.
 
युद्धविराम की घोषणा दोनों तरफ से हुई लेकिन चाचा शिवपाल यादव के खिलाफ इस महायुद्ध का शंखनाद अखिलेश यादव ने किया था. साढ़े चार साल तक पिता मुलायम सिंह यादव और चाचाओं के साए में सत्ता संभालते रहे अखिलेश यादव ने पहली बार परिवार, पार्टी और जनता सबको एहसास कराया कि वो कठपुतली नहीं हैं कड़े फैसले भी लेने का दम रखते हैं.
 
अखिलेश यादव के जिस फैसले पर बवाल हुआ, वो फैसला था कैबिनेट से गायत्री प्रजापति और राजकिशोर सिंह की बर्खास्तगी और चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को हटाने का. ये सबके सब शिवपाल यादव के करीबी माने जाते हैं.
 
इंडिया न्यूज़ के खास कार्यक्रम इस हफ्ते में देखिए समाजवादी पार्टी के अंदर के घमासान की पूरी कहानी.