नई दिल्ली. कलयुग में संजीवनी रिटर्न्स. जी हां, वही संजीवनी जिसकी चर्चा अब तक सिर्फ धार्मिक ग्रंथों में होती रही है, जिसकी बात आयुर्वेद सदियों से करता रहा है. वो संजीवनी बूटी अब बहुत जल्द हकीकत का रूप लेने वाली है.
 
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जरा सोचिए अब तक आपने शरीर के कटे हुए अंगों या बीमार हिस्सों को सर्जरी के जरिये जोड़ने या ठीक करने की तस्वीर देखी होंगी, लेकिन अगर संजीवनी मिल गई तो कई लाइलाज बीमारियों को भी मात दी जा सकती है.
 
जी हां, त्रेतायुग में जिस संजीवनी बूटी ने मृत्युशैय्या पर पहुंच चुके लक्ष्मण की जान बचाई थी, वो चमत्कारिक औषधि अब कलयुग में भी दुनिया को अमरत्व का वरदान देगी. क्योंकि हिमालय पर संजीवनी को ढूंढने का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू हो चुका है.
 
रामायण का वो प्रसंग भला कौन भूल सकता है जब मेघनाद के खिलाफ युद्ध के दौरान लक्ष्मण पर ऐसा प्राणघातक वार हुआ कि वो मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़े थे, जिनको बचाने के लिए हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाई थी.
 
आयुर्वेद और प्राचीन औषधियों के जानकार इस इलाके में लंबे अरसे से संजीवनी बूटी की खोज करते आ रहे हैं. इनमें से कुछ का तो ये दावा भी है कि उन्होंने रामायण काल की संजीवनी बूटी ढूंढ निकाली है.
 
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तो क्या सच में आज भी संजीवनी बूटी इस धरती पर मौजूद है. जानने के लिए देखिए इंडिया न्यूज़ का खास शो सच कहता हूं.

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