नई दिल्ली. हाथों की लकीरों में अपने लिए लकीरें खींचने वाले लोग अपने आप में एक बड़ी मिसाल बन जाते हैं ? वे कुछ ऐसा करते हैं जिससे दूसरों में जीने की उम्मीद और हौसला दोनों पैदा होते हैं. ऐसे ही लोग संघर्ष को सही मायने देते हैं. 
 
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ऐसी ही एक शख्सियत हैं अर्जेंटिना के स्टार फुटबॉलर लियोन मेसी. कोपा अमेरिका कप के फाइनल में चिली के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में मेसी गोल करने से चूक गए थे, इस कारण अर्जेंटीना हार गई थी. इसके बाद मेसी ने सिर्फ 29 साल की उम्र में संन्यास की घोषणा कर दी थी.
 
मेसी का जीवन एक संघर्ष है. मेसी मात्र 9 साल की उम्र में भयानक बीमारी के शिकार हो गए थे. उनके मजदूर पिता और सफाईकर्मी मां के पास बेटे के इलाज के लिए पैसे नहीं थे. स्पेन के क्लब बार्सिलोना ने 9 साल के मेसी के इलाज का खर्च उठाया था. तीन साल तक मेसी को रोज हार्मोन्स के इंजेक्शन लगते थे. उनकी हिम्मत और फुटबॉल के जुनून के आगे बीमारी भी ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाई. 
 
मेसी ने अपने करियर में अर्जेंटिना के लिए सर्वाधिक 55 गोल दागे हैं. वह सबसे ज्यादा पांच बार फीफा के बेस्ट फुटबॉलर ऑफ द वर्ल्ड रहे हैं. 
 
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इंडिया न्यूज के खास शो ‘संघर्ष’ में मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत आपको बताएंगे कि लियोन मेसी के जीवन में क्या उतार-चढ़ाव आए. इसके साथ ही उन्होंने फुटबॉल के इतिहास में अपना नाम कैसे दर्ज किया.

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