नई दिल्ली. जब कुदरत को गुस्सा आता है तो बड़ी बड़ी इमारतें, पुल, दफ्तर, घर पेड़ पौधे हवाई जहाज़ सब तबाह हो जाते हैं. उत्तरी ध्रुव से लेकर दक्षिणी ध्रुव तक कोई भी कुदरत के इस कहर से आज तक बचा नहीं है. लेकिन पूरी दुनिया में शहर के शहर को कब्रिस्तान बनाने वाला ये भूकंप हिंदुस्तान का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा. भूकंप से किसी के परिवार का कोई अपनी जान नहीं गवांएगा. सुनने में हैरानी जरुर हो रही होगी लेकिन ये बात है सौ फीसदी सच है. 
 
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दिल्ली-गुडगांव-गाज़ियाबाद और नोएडा जैसे इलाके आज ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों से भरे पड़े हैं और इनमें से अधिकतर जगहें भूकंप के दौरान खतरनाक साबित हो सकती हैं. इसलिए भूकंप के इस बड़े खतरे से बचने के लिए प्रलय रक्षक यानि एक ऐसी खोज जिससे भूकंप के खतरे को काफी कम किया जा सकता है.
 
प्रलय रक्षक न सिर्फ भूकंप की चेतावनी देता है बल्कि ये उन तमाम खतरों को भी रोक देता है जिससे ज्यादा जान माल का नुकसान हो सकता है. भूकंप आने की स्थिति में ये पहले देखता है कि भूकंप की तीव्रता क्या है. उसके बाद उसी हिसाब से ये हर बिल्डिंग में मौजूद गैस, पानी, बिजली, लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं को बड़ा खतरा बनने से रोकता है. 
 
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भूकंप के खतरे को कम करने वाले इस यंत्र को हिंदुस्तान से पहले दुनिया के 25 देशों ने इस्तेमाल किया है. जिसमें अमेरिका, जर्मनी, इंडोनेशिया , ईरान जैसे देश शामिल हैं. हिंदुस्तान इस प्रलय रक्षक का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का 26वां देश होगा.
 
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