दिल्ली सरकार में कानून मंत्री की कुर्सी केजरीवाल के लिए एक बड़ी मुसीबत बनती जा रही है इस कुर्सी पर जो भी बैठता है वो केजरीवाल के परेशानी बन जाता है. केजरीवाल जब दिल्ली में पहली बार सीएम बने तब सोमनाथ भारती को कानून मंत्री बनने का मौका मिला लेकिन खिड़की एक्सटेंशन विवाद में उनके साथ-साथ केजरीवाल सरकार की खूब फजीहत हुई. दूसरी बार जब केजरीवाल दिल्ली में फिर से चुनकर आए तो कानून मंत्री की कुर्सी जितेन्द्र तोमर को सौंपी गई.
 
जितेन्द्र तोमर फर्जी डिग्री केस में पकड़े गये इसके बाद कपिल मिश्रा को कानून मंत्री बनाया गया. कुर्सी पर बैठते ही कपिल मिश्रा एक्शन में आये और उन्होंने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ टैंकर घोटाले में केजरीवाल से एफआईआर की सिफारिश कर दी. कपिल मिश्रा भी ज्यादा दिन इस कुर्सी पर नहीं टिक सके. कपिल मिश्रा के बाद केजरीवाल ने अपने बेहद करीबी मनीष सिसौदिया को कानून मंत्रालय का अतिरिक्त पदभार सौंप दिया। क्या पिछले कानून मंत्रियों की तरह मनीष सिसौदिया भी केजरीवाल के लिए कोई नई मुसीबत बनेंगे, ये पूरा प्रकरण देखिये स्माइल प्लीज़ के इस एपिसोड में….

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