नई दिल्ली : गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को स्पांसर करना बंद करे ताकि हम बेहतर माहौल में क्रिकेट खेल सकें. इंडिया न्यूज़ द्वारा अर्द्धसैनिक बलों के शूरवीरों के सम्मान में आयोजित शौर्यगाथा समारोह में राजनाथ ने बीसीसीआई द्वारा सरकार से पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के अनुरोध पर ये बयान दिया.
 
पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने को लेकर सरकार से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अनुरोध पर इंडिया न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया के सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं जानता हूं कि यदि इसका जवाब दूंगा तो जरूर कंट्रोवर्सी होगी. बस मैं पाकिस्तान से यही अपील करूंगा कि पाकिस्तान इस आतंकवाद को स्पांसर करना बंद कर दे ताकि हम बेहतर माहौल में क्रिकेट खेल सकें.” दीपक चौरसिया ने फिर सवाल पूछा, आज के माहौल में नहीं तो राजनाथ ने कहा, “मैंने जितना कहा… ताकि बेहतर माहौल में हमलोग क्रिकेट खेल सकें.”
 
 
उन्होंने कहा कि कश्मीर की स्थिति ये है कि आतंकियों के खिलाफ जब जवान लड़ते हैं तो गांव के लोग उन पर पत्थर फेंकते हैं. सिंह ने कहा कि पत्थर फेंकने वालों को पाकिस्तान से पत्थर फेंकने के लिए पैसे दिए जाते हैं और जो जितना पत्थर फेंकता है, उसे उतने पत्थर के पैसे दिए जाते हैं.
 
दिल्ली के ताज पैलेस होटल में शुक्रवार को आयोजित शौर्यगाथा समारोह में राजनाथ सिंह ने अर्द्धसैनिक बलों के 13 शूरवीरों को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया. इस मौके पर गृहमंत्री ने अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के जज्बे की तारीफ की और जवानों के सम्मान में शौर्यगाथा समारोह आयोजित करने के लिए इंडिया न्यूज को धन्यवाद दिया. समारोह में आईटीवी नेटवर्क के फाउंडर और प्रोमोटर कार्तिकेय शर्मा के अलावा कई पारामिलिट्री फोर्स के महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
 
 
गृहमंत्री ने इस मौके पर देश के लिए जवानों के त्याग, उनकी समस्याओं और सरकार के प्रयासों की भी चर्चा की और ऐलान किया कि शहीदों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपए की सहायता मिले इसके लिए सरकार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इस मसले पर वो मदद मांगने के लिए वो कॉरपोरेट जगत के दरवाजे पर भी जाएंगे.
 
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी देशभक्ति के जज्बे से ही फांसी होने पर भी मुस्कुराते थे. इसी देशभक्ति के जज्बे से हमारी सुरक्षा में जवान और अधिकारी जुटे हैं इसलिए हमारा देश सुरक्षित है. सुरक्षा बलों के जवानों की समस्याओं पर गृहमंत्री ने कहा, “जवानों के परिवार के लिए सरकार और कई संस्थाएं काम कर रही हैं. शहीद जवानों के परिवार को कम मिलता रहा है लेकिन मैंने तय किया है कि शहीद के परिवार को किसी भी कीमत पर एक करोड़ से कम नहीं मिलना चाहिए. अगर शहीदों के परिजनों की सहायता में पैसे कम पड़े तो हम कॉरपोरेट से भी मदद लेंगे. इस पर बातचीत जारी है. दिव्यांग जवानों के परिवार के लिए भी कुछ करेंगे.’
 
राजनाथ ने आगे कहा, “जिंदगी को पैसे के आधार पर नहीं आंका जा सकता लेकिन परिवार के लिए जरूर कुछ न कुछ होना चाहिए. हाउसिंग को लेकर भी सोच रहे हैं कि क्या किया जा सकता है. जवानों को अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है. आप कल्पना कीजिए कि 22-24 साल का जवान अपनी पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर सीमा पर रहते हैं तो उन पर क्या गुजरती है. देशभक्ति का जज्बा है उनमें जो देश के लिए त्याग की भावना पैदा करता है. ये जज्बा कायम रहे और मुझे विश्वास है कि देशवासी सुरक्षा बलों के साथ अंत तक खड़े रहेंगे.”

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