नई दिल्ली: जब दो दुश्मन एक दूसरे के सामने तनकर खड़े हों और दोनों ही जंग के लिए तैयार हों तो फिर तबाही को टालना नामुमकिन सा हो जाता है. लेकिन नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच जो जुबानी जंग छिड़ी है. उसमें तबाह कौन होगा और तबाही लायेगा कौन. आज हम आपको बतायेंगे. किम जोंग और डोनाल्ड ट्रंप के तेवर इशारा कर रहे हैं कि छोटी ही सही लेकिन अब जंग तो होकर रहेगी. इसलिए इन दोनों मुल्कों की आसमानी सैन्य ताकत के बारे में जानना बेहद जरूरी है. वैसे हवाई ताकत के मामले में किम जोंग अमेरिका के सामने कहीं नहीं ठहरता. तो चलिये अब आपको ट्रंप और किम की आसमानी सैन्य ताकत के बारे में बताते हैं.

जंग होगी तो फिर जाहिर है जमीन और समंदर पर भी दोनों मुल्क आमने सामने होंगे. यहां टक्कर बराबर की होगी या फिर अमेरिका भारी पड़ेगा. इसके लिए दोनों मुल्कों की जमीनी और समुद्री ताकत का हिसाब-किताब जानना भी जरूरी है. परमाणु बमों के बाद अगर किम जोंग को किसी पर सबसे ज्यादा नाज है. तो वो हैं उसके सनकी कमांडो, जिन्हें किम जोंग अजेय मानता है. किम जोंग का मानना है कि उसके ये सनकी कमांडो उसके हुक्म पर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकते हैं. लेकिन किम के ये कमांडो अमेरिका के नेवी सील कमांडोज़ के सामने कहीं नहीं ठहरते.

आसमान के बाद दोनों मुल्क अगर भिड़े तो जंग समंदर में होगी. इसके लिए अमेरिका पहले से तैयार है. कोरियाई समुद्री सीमा में अमेरिका ने मिशीगन पनडुब्बी को तैनात कर रखा है. परमाणु पनडुब्बी मिशीगन अपने आप में पूरी फौज है, जो चंद मिनटों में कई दर्जन टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें दागकर नॉर्थ कोरिया की ईंट से ईंट बजा सकती है. इस पनडुब्बी में 154 क्रूज़ मिसाइलें तैनात हैं. इसी तरह अमेरिका ने कोरियाई समंदर में कार्लविन्सन वॉरशिप को तैनात कर रखा है. समंदर में इसकी मौजूदगी नॉर्थ कोरिया की बर्बादी का संकेत है. ये युद्धपोत परमाणु हथियारों से लैस है और इस पर हर वक्त 90 एयरक्राफ्ट तैनात हैं. यानी जंग का बिगुल बजते ही इस जंगी जहाज़ से बमबारी और 90 लड़ाकू विमानों का हमला किम जोंग को संभलने तक का मौका नहीं देगा.

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