नई दिल्ली: 22 नवंबर 2017 को सुखोई से ब्रह्मोस मिसाइल का टेस्ट सफल रहा और इसी के साथ सैन्य ताकत के मामले में हिंदुस्तान उस मकाम पर पहुंच गया है, जहां से दुश्मन के लिए चुनौती देना आसान नहीं रह गया. भारत ने सैन्य ताकत में लंबी छलांग लगा दी है. सुखोई-30 और ब्रह्मोस मिसाइल का ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसके बारे में जानकर दुश्मन की रगों में खौफ दौड़ने लगता है क्योंकि दुश्मन जमीन पर हो या फिर पाताल में उसका बचना ना मुमकिन है. पीओके में ट्रेनिंग कैंप चला रहे आतंकियों की टेंशन भारत के इस टेस्ट से बढ़ गई है.

आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के साझा प्रयास के साथ बनाया गया है. ये बात शायद बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि लॉन्च होने के बाद टारगेट तक पहुंचने के लिए रास्ता बदल सकती है ब्रह्मोस मिसाइल. बता दें कि सुखोई-30 और ब्रह्मोस मिसाइल से दुश्मनों के इरादों को ध्वस्त किया जाएगा. शुरुआती दौर में 42 सुखोई लड़ाकू विमान ब्रह्मोस मिसाइल से लैस होंगे. ब्रह्मोस मिसाइल एक लड़ाकू विमान नहीं है बल्कि दुश्मनों का काल है. इसके हमले से बचना अब नामुमकिन हो गया है क्योंकि इस लड़ाकू विमान को ऐसी शक्ति मिल गई है जिसने हिंदुस्तान की सैन्य ताकत में तो इजाफा किया ही साथ ही साथ दुश्मनों के खेमें में खलबली मचा दी है.

अब भारत के पास मौजूद ये लड़ाकू विमान जिससे अब दुश्मन के इलाके में बनें आतंकी कैंप को मिसाइल दागकर तबाह किया जा सकता है. दुश्मन के अंडरग्राउंड बंकरों को मिसाइल हमले से मिट्टी में मिलाया जा सकता है. यहां तक की इसके निशाने से दुश्मन के युद्धपोत भी नहीं बच पाएंगे.

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