नई दिल्ली. इस साल 1 दिसंबर 2019 को विवाह पंचमी मनाया जाएगा. भारत में विवाह पंचमी की को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है. विवाह पंचमी का दिन इसलिए खास होता है कि इस दिन भगवान राम और माता सीता की विवाह हुआ था. विवाह पंचमी को भारत के साथ-साथ नेपाल में भी उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. माता सीता का जन्म राजा जनक के यहां हुआ था, जो नेपाल के जनकपुर के राजा थे. आजकल यह इसको मिथिला नरेश और मिथिला जनकपुर नेपाल का भी हिस्सा है. इन दोनों देश में विवाह पंचमी पूरे उत्साह और परम्परा को पालन करते हुए मनाया जाता है.

 पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम और सीत का स्वंयबर मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष को हुआ था. यह स्वयंबर इतना भव्य था कि पुराणों में इसका वर्णन मिलता है. विवाह पंचमी इस वर्ष 1 दिसबंर को है. इस दिन भगवान राम जी की बरात नेपाल के जनकपुर जाता है. अयोध्या से हर साल पूरी परम्परा की पालन करते हुए बरात जनकपुर नेपाल जाती है और वहां पर भगवान राम और माता सीता की स्वयंबर रचाई जाती है.

आइए जानते हैं विवाह पंचमी की कथा- मान्यता है कि भगवान राम और माता सीता को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के रूप थे. जो धरती पर राजा दशरथ के पुत्र और माता सीता राजा जनक के पुत्रा के रूप में जन्म लिया था. पुराणो के अनुसार सीता मैया का जन्म धरती से हुआ था. उस समय राजा जनक खेतों के तरफ गए थे वहीं उनको सीता मैया रोते हुए मिली थी.

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इसके बाद से ही सीता जी को जनक पुत्री के नाम से जाना जाता है. माता सीता ने मंदिर में रखे भगवान शिव के धनुष को उठा लिया था, जिसे भगवान परशुराम के अलावा इस धनुष को किसी ने नहीं उठाया था. जनकपुर के राजा ने निर्णय लिया कि जो इस धनुष को उठाएगा उसी से अपनी बेटी का स्वयंबर रचाएंगे. राजा जनक ने स्वयंबर का दिन तय किया और इस संदेश को कई राज्यों में भेजा गया. इस स्वयंबर का हिस्सा महार्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्ष्मण भी दर्शक के रूप में शामिल हुए.

कई राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को उठामे का प्रयास किया लेकिन नहीं सफल हुए. इस प्रदर्शन को देखते हुए राजा जनक ने दुखी मन से कहा कि यहां कोई नहीं है जो मेरी पुत्री के योग्य है. उनकी इस मनोदशा को देखकर महार्षि वाशिष्ठ ने भगवान राम को इस प्रतियोगिता शामिल होने के लिए कहा. गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए राम ने स्वयंबर में भाग लेते हुए भगवान शिव के धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, लेकिन वह धनुष टूट गया और इस प्रकार से वह स्वयंबर को जीत गए. इस प्रकार सीता माता से भगवान राम से विवाह हुआ.

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