नई दिल्ली: हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्य को वट सावित्री का व्रत महिलाएं रखती हैं. इस व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इस बार वत्र सावित्री का व्रत 3 जून यानी सोमवार को पड़ा है. सौभाग्य की कामना करते हुए महिलाएं वट सावित्री के व्रत को अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं. इस बार जो भी महिलाएं वट सावित्री का व्रत रख रही हैं, उनके लिए महूर्त का जानना बहुत जरुरी है. बता दें 2 जून को 4:39 बजे से अमावस्य की तिथि की शुरूआत हो जाएगी, और 3 जून को 3:31 मिनट पर अमावस्य की तिथि खत्म हो जाएगी. इस दिन महिलाओं को सुबह उठकर स्नान आदि करके शुद्ध हो जाना चाहिए, उसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहन कर सोलह श्रृंगार करना चाहिए.

एक टोकरी में पूजन की सारी सामग्री को रख लेनी चाहिए, उसके बाद वट वृक्ष के पास पहुचना चाहिए वहां सफाई करके सामग्री को रखना चाहिए और एक स्थान पर बैठ जाना चाहिए. उसके बाद सबसे पहले स्तयवान और सावित्री की मूर्तियों को स्थापित करना चाहए. उसके बाद धूप, दीप, रोली, भिगोए चने, सिंदूर आधि सामग्री से वट सावित्री का पूजन करना चाहिए. इस दिन महिलाएं पंडित जी से कथा सुनती हैं, इसके अलावा वट के वृक्ष में 5, 11, 21, 51 या फिर 108 बार धागा लपेटते हुए पेड़ की परिक्रमा करती हैं. 

वट सावित्री व्रत कथा-

मद्र देश के राजा अश्वपति ने अपनी पत्नी के साथ सावित्री देवी का विधिपूर्वक व्रत रखा था, जिसके बाद उन्हें पुत्री की प्रप्ति हुई थी. राज ने अपनी पुत्री का नाम भी सावित्री रखी, सावित्री जब बड़ी हुईं तो अश्वपति ने उन्हें अपने मंत्री के साथ वर को चुनने के लिए भेजा. सावित्री ने जैसे ही सत्यवान को अपने वर के रुप में चुना देवर्षि नारद ने सबको बता दिया कि विवाद के 12 साल बाद सत्यवान की मृत्यु को जाएगी. इसे जानने के बाद अश्वपति ने अपनी पुत्री को दूसरा वर चुनने के लिए कहा, लेकिन सावित्री नहीं मानी. सावित्री को नारद जी से अपने पति के मृत्यु का समय पता चल गया, जिसके बाद वो अपने पति और सास, ससुर के साथ वन में रहने लगीं. सावित्री ने नारद जी के बताए दिन से कुछ समय पहले से व्रत रखना शुरू कर दिया. उसके बाद जब सावित्री के पति को यमराज लेने आए तो वो उनके पीछे चलने लगीं, जिसके बाद यमराज ने सावित्री की निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने के लिए कहा. सावित्री ने सबसे पहले वर में अपने अंधे सास-ससुर की आंखो की रोशनी मांगते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की. उसके बाद भी सावित्री यमराज के पीछे चलती रहीं दूसरे वर में सावित्री ने यमराज से अपने पति का छूटा राज पाठ मांगा. आखिर में सावित्री ने यमराज से सौ पुत्रों का वरदान मांगा, जिसके बाद यमराज ने उनके पति के प्राण को वापस लौटा दिया.

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