नई दिल्ली. इस साल 22 नवंबर को पूरे देशभर उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी. हिंदू धर्म को मानने वाले मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष को उत्पन्ना एकादशी मनाई जाती है. कई लोग इस दिन को कृष्ण पक्ष होने के वजह से कृष्ण एकादशी के नाम से भी जानते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के भक्त उनकी पूजा-अर्चना की जाती है. उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत भी रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भक्त मर्णोपरांत वैंकुण्ठ जाता है. पुराणो में बताया गया है कि भगवान विष्णु इस दिन देवी एकादशी के रुप में उत्पन्न होकर भयानक राक्षस मुर का वध किया था.

आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत और पूजा विधि- दशमी को सात्विक भोजन करने के बाद एकादशी के दिन सुबह में उठकर स्नान करना चाहिए, फिर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करना चाहिए. एकादशी व्रत के दौरान पूरे दिन ध्यान रहे कि अन्न का अंश मुंह के अन्दर ना जाए. व्रत के दौरान न अधिक बोलें .

इस दिन व्रत करने वाले लोगों को चोर, पाखंडी, निंदक, मिथ्याभाषी और किसी भी प्रकार के पापी लोगों से दूर रहना चाहिए. भक्तों को इस दिन अपने जीवन में हुए पाप की क्षमा मांगना चाहिए. इस दिन धर्मात्मा पुरुषों को कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की एकादशियों को एक समान समझना चाहिए.

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इस दिन जो मनुष्य ऊपर लिखि विधि के अनुसार एकादशी का व्रत करते हैं, तो उन्हें शंखोद्धार तीर्थ में स्नान करके भगवान के दर्शन से जो फल प्राप्त होता है वह एकादशी व्रत के सोलहवें भाग के सामान नहीं है. इस दिन दो व्यक्ति दान देता है उसे लाख गुणा फल होता है. संक्रांति से चार लाख गुना तथा सूर्य ग्रहण के दिन स्नान दान से जो पुण्य प्राप्त होता है वही फल एकादशी के दिन व्रत करने से मिलता है.

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