नई दिल्ली. Utpanna Ekadashi Katha in Hindi:  प्राचीन काल की बात है भगवान कृष्ण से उनके परम भक्त युद्धिष्ठर ने पूछा कि एकादशी व्रत किस विधि अनुसार करना चाहिए. इस बात को सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि सबसे पहले हेमंत ऋतु में मार्गशीर्ष ने कृष्ण एकादशी के दिन उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत करना शुरु किया था. इसके बाद भगवान अपने भक्त से कहने लगे हे युद्धिष्ठर सतयुग में मुर नामक राक्षस था. वह बहुत ताकतवर और भयानक था. उस मुर नाम के राक्षस ने स्वर्गलोक से सभी देवी- देवताओं को भगा दिया था.

इसके बाद भगवान इंद्र मुर राक्षस से भयभीत होकर मदद के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे तब शिव जी ने सभी देवी- देवताओं से कहा कि तीनों लोकों के स्वामी, भक्तों के सभी दुखों को हरने वाले भगवान विष्णु के शरण में जाओ. वे ही आपके दुखों का सामधान कर सकते हैं. भगवान इंद्र शिव जी की बात को सुनकर. भगवान विष्णु से मदद लेने के लिए क्षीरसागर पहुंचे. वहां पर भगवान विष्णु के शयन अवस्था में देख कर दोनो हाथो से उनकी स्तुति करने लगे. आपको नमस्कार आप हम देवताओं की रक्षा करें. मुर नाम के राक्षस से भयभीत होकर आपके शरण में आया हूं.

भगवान विष्णु जी ने इंद्र भगवान की बात सुनकर कहने लगे. ऐसा मायावी और बलशाली दैत्य कौन है. जिसन सभी देवी-देवताओं को हरा कर स्वर्गलोक पर कब्जा कर लिया है. इस बात को सुनकर भगवान इंद्र ने कहा कि प्राचीन समय में एक नाड़ीजंघ राक्षस था, उसका ही महापराक्रमी पुत्र है मुर राक्षस. उसी ने सभी देवी-देवताओं को हराकर स्वर्गलोक पर अधिपत्य जमा लिया है.

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इस बात को सुनकर भगवान विष्णु ने कहा कि हे देवी- देवताओं बहुत जल्द में उसका संहार करुंगा और भगवान इंद्र को कहा कि तुम वापस चंद्रवती नगर जाओं. इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सर्प बाणों से बींध डाला. इससे बहुत सारे दैत्य मारे गए लेकिन महादानव राक्षस मुर बचा रहा. यह युद्ध कई सालों तक चलता रहा. इस लड़ाई से थककर भगवान विष्णु बद्रिका आश्रम चले गए.

जब विष्णु जी सो रहे थे तब मुर उनको खत्म करने के लिए उनके पीछे- पीछे आ गया और भगवान को सोया हुआ देख कर मारने के कोशिश कर रहा था. तभी भगवान विष्णु के शरीर से उज्जवल कांतिमय से उत्पन्न होने से देवी प्रकत हुई. देवी ने राक्षस को ललकारा, युद्ध किया और उसे मार दिया. जब भगवान योगनिद्रा से उठे तो सब बातो को जानकर उस देवी से कहा कि आपका जन्म एकादशी के दिन हुआ है. आज से आप उत्पन्ना एकादशी के नाम से पूजी जाएंगी.

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