नई दिल्ली. हिंदू कैलेंडर में त्योहारों और व्रतों का खासा महत्तव है. लोहड़ी, मकर संक्रांति, संकष्टी चतुर्थी के बाद अब 1 फरवरी को तिल द्वादशी मनाई जाएगी. सृष्टि के पालनकर्ता और रचएता भगवान विष्णु को समर्पित तिल द्वादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को तिल द्वादशी के रुप में माना गया है. 1 फरवरी को पड़ रही तिल द्वादशी के अवसपर भगवान विष्णु जी को तिल का भोग लगाया जाता है.

साथ ही इस दिन दान- दक्षिणा करने और पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी परेशानियों का अंत और पाप भी पानी में धुल जाते है जिसके बाद उन्हें पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. तिल द्वादशी के दिन सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें जिसके बाद सूर्य नमस्कार करते हुए सूर्य देव का मंत्र पढ़े और उन्हें जल का अर्घ्य करे. तिल द्वादशी के व्रत की पूजा करते समय उत्तर दिशा की ओर मुंह करते हुए भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा पूरी विधि के साथ की जाए.

विधि पूर्वक पूजा करते हुए भगवान विष्णु को दूध, दही, शहद, जल से अभिषेक करने के बाद उन्हें फल, फूल, मौली, चावल चीजें चढ़ाए जिसके बाद उन्हें प्रसाद का भोग लगाए जो तिल अथवा गुड़ से बनाए गए हो. खासतौर पर तिल के लड्डू का भोग लगाने का खासा महत्तव माना जाता है. तिल द्वादशी पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करे. इस व्रत को करने से व्यक्ति को जन्म और मृत्यु से हमेशा के लिए मुक्ति प्राप्त होती है.

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