नई दिल्ली. हर साल 12 अमवस्या होती है. प्रत्येक अमावस्या का अपना महत्व होता है. इस माह सोमवती अमवस्या है. सोमवती अमावस्या 18 दिसंबर को है. इस दिन सर्वार्ध सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है. इस योग में सोमकुंड और शिप्रा में स्नान और दान-पुण्य का खास महत्व माना जाता है. इस दिन स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है. प्राचीन महत्व के अनुसार सोमवती अमवस्या पर स्नान किया जाता है. कहा जाता है कि अगर सोमवती अमवस्या सोमवार हो तो ये और भी फलदायक होती है. इस बार सोमवती अमावस्या सोमवार को ही पड़ रही है. साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा. अमावस्या काल में घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा पित्रों की पूजा की जाती है.

सोमवती अमवस्या के दिन व्रत करने की परंपरा भी है. इस व्रत को शादीशुदा महिलाएं किया करती हैं. इस व्रत को सुहागिनें अपनी पति की लंबी उम्र की कामनाएं करती हैं. पितृ दोष व काल सर्प यो वालों के लिए इस पूजा का खास महत्व होता है. कहा जाता है कि कि पूपील के पेड़ की परिक्रमा करने से जीवन में सुख व शांति आति है. पित की लंबी आयु प्राप्त होती है. इस दिन मौन व्रत भी किया जाता है. इस दिन पूजा पाठ करने से पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन पूजा के दौरान विशेष मंत्र का उच्चारण करें.

।।अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांचीअवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेया: सप्तैता मोक्ष दायिका।।
।।गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिन्धु कावेरी जलेस्मिनेसंनिधि कुरू।।

सोमवती अमावस्या 2017: अगर नहीं है विशेष पूजा का समय तो इस काम को करने से मिलेगा लाभ

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