नई दिल्ली:  (Sharavan Putrada Ekadashi) हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व है. ये पूरे देश में श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाती है. खास बात ये है कि पुत्रदा एकादशी साल में दो बार मनाई जाती है. पुत्रदा एकादशी श्रावण (सावन) महीना शुक्ल पक्ष और पौष महीना शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन पुत्रदा एकादशी होती है. पौष महीने में पड़ने वाली एकादशी दिसंबर या जनवरी में होती है. सावन महीने में पड़ने वाली एकादशी अगस्त में आती है. देशभर में पुत्रदा एकादशी का अलग अलग महत्व है. पौष महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी खासकर उत्तर भारत में मनाई जाती है. वहीं अगस्त में होने वाली सावन पुत्रदा एकादशी (Sharavan Putrada Ekadashi) का महत्व दक्षिण भारत में ज्यादा है. हिंदू धर्म में ऐसा मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने से संतान सुख कि प्राप्ति होती है. इसके अलावा मृत्यु के बाद मोक्ष मिल जाता है.

कब है श्रावण पुत्रदा एकादशी

साल 2019 में इस बार श्रावण पुत्रदा एकादशी आगामी रविवार यानी 11 अगस्त को है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक ये एकदशी हर साल सावन के दौरान अगस्त महीने में आती है. कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है.

क्या है श्रावण पुत्रता एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार श्रावण पुत्रदा एकादशी का प्रारंभ 10 अगस्त 2019 को दोपहर बाद 3 बजकर 39 मिनट से होगी. जो अगले दिन 11 अगस्त 2019 को शाम 4 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. उसके बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी का समापन हो जाएगा. वहीं पारण का टाइम 12 अगस्त 2019 को सुबह 6 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.

श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका कि देशभर में श्रावण पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत रखने से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है. ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से योग्य एवं गुणी संतान की प्राप्ति होती है. मान्यता ये भी है कि अगर इस दिन वे दंपति जिनके कोई संतान नहीं हुई है पूरे तन मन से अगर व्रत रखें तो निश्चय ही उनके घर संतानोपत्ति होगी. 

विधि

जो लोग श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं उन्हें तड़के उठकर भगवान विष्णु का पूरे मनोयोग से स्मरण करना चाहिए. उससे बाद स्नान आदि कर साफ और सुथरे वस्त्र धारण करें. घर में मौजूद भगवान विष्ण की मूर्ति के आगे दीप प्रज्वलित करें. इसके अलावा भगवान विष्णु की फोटो और मूर्ति को स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं. विष्णु भगवान को फलों का भोग लगाएं. पूजा करते वक्त तुलसी, मौसमी फल और तिल का प्रयोग करें. पूरे दिन निराहार रहें और शाम के समय श्रावण पुत्रदा की कथा सुनने के बाद सिर्फ फलाहार करें. अगले दिन बारह ब्राहम्णों को खाना खिलाएं तथा उसके आप भी भोजन ग्रहण करें.

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