नई दिल्ली. श्रावण मास के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से पुत्र रतन प्राप्ति होगी है. जो लोग संतान हीन हैं उनके लिए यह व्रत काफी शुभ बताया गया है. इस साल पुत्रदा एकाशदी का व्रत 19 अगस्त को रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है, उसे भगवान श्री हरी विष्णु जी का आशिर्वाद मिलता है और जल्द ही संतान प्राप्ति हो जाती है.

Shravana Putrada Ekadashi 2019: पुत्रदा एकादशी का महत्व
शास्त्रों में पुत्रदा एकादशी का खास महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति को संतान प्राप्ति नहीं हो रही है वह पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर करें. जो भी संतान हीन व्यक्ति इस व्रत को दिल से रखेगा उसपर विष्णु भगवान की कृपा बरसेगी और जल्द ही एक योग्य संतान की प्राप्ति होगी. पुत्रदा एकादशी का इतना बड़ा महत्व माना गया है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उसकी संतान बहुत आज्ञाकारी होती है.

Shravana Putrada Ekadashi 2019: पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी व्रत करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करें और पीले रंग के साफ वस्त्र धारण करें. जिसके बाद मंदिर में विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करने और शंख में जल भरकर उनका अभिषेक करें. पूजन के दौरान चंदन का तिलक लगाना शुभ बताया गया है. पूजा के दौरान चावल, अबीर, फूल, रोली और इत्र का प्रयोग भी किया जाता है.

Shravana Putrada Ekadashi 2019: पुत्रदा एकादशी कथा
काफी समय पहले भद्रावती नगर में राजा सुकेतुमान का शासन था, उनकी रानी का नाम शैव्या था. काफी साल बीतने पर भी राजा और रानी को संतान की प्राप्ति नहीं हुई जिससे वे काफी परेशान रहते हैं. इसी चिंता से घिरकर एक बार राजा वन की ओर चले गए जहां उन्हें प्यास लगी तो पानी की तलाश में एक सरोवर के पास पहुंच गए. राजा ने देखा सरोवर के पास ऋषियों का आश्रम भी है जहां ऋषि-मुनी वेदपाठ कर रहे हैं. पानी पीने के बाद राजा ने आश्रम पहुंचकर ऋषियों को प्रणाम किया.

आश्रम में राजा को ज्ञात हुआ कि सभी ऋषि सरोवर के पास स्नान करने आए हैं. ऋषियों ने राजा को बताया कि आज पुत्रदा एकादशी है जिसके पांचवे दिन माघ मास का स्नान शुरू हो जाएगा. जो मनुष्य इस दिन व्रत करता है उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है. ऋषियों की बात सुनकर राजा ने महल पहुंचकर पुत्रदा एकादशी का व्रत शुरू किया और द्वादशी को पारण किया. व्रत के प्रभाव से कुछ ही समय में रानी गर्भवती हो गईं और उन्होंने एक पुत्र की प्राप्ति हुई.

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