नई दिल्ली. बुधवार 17 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत हो गई है. मान्यता है कि इस माह में भोलेनाथ शिव शंकर भगवान सर्व सुलभ हो जाते हैं. सावन महीने की शुरुआत 10 शुभ संयोगों के साथ हुई है. श्रावण मास पूरे 30 दिनों तक रहेगा. श्रावण मास में चार सोमवार आएंगे जिसमें तीसरे सोमवार को त्रियोग का संयोग बन रहा है. हरियाली अमावस्या के दिन पंच महायोग का संयोग बनेगा. कहा जा रहा है कि ऐसा संयोग पूरे 125 सालों के बाद बन रहा है. इस विशेष संयोग में ही नाग पंचमी मनाई जाएगी.

भगवान शिव की अराधना के लिए सोमवार और नांग पंचमी का दिन श्रेष्ठ माना जाता है. कई सालों के बाद रक्षाबंधन और 15 अगस्त श्रवण नक्षत्र के संयोग में मनाया जाएगा. 1 अगस्त को पहला सिद्धी योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग का संयोग है.

सावन के पावन मास में भोलेनाथ की पूजा-अराधना की जाती है. मान्यता है कि इस माह अगर भक्त पूरी श्रद्धा के साथ शिव जी की पूजा करते हैं उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं. शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सावन के हर सोमवार को व्रत किया जाता है.

सावन सोमवार व्रत पूजा विधि

1. सावन सोमवार व्रत के लिए सुबह स्नान करें और पूजा स्थान की सफाई करें. घर के पास अगर कोई मंदिर है तो वहां जाकर भगवान शिव के पवित्र शिवलिंग पर दूध अर्पित करें. मंदिर में शंकर भगवान के सामने आंख बंद कर शांति से बैठकर व्रत का संकल्प लें.

2. व्रत रखकर सुबह और शाम शिव जी और देवी पार्वती की अर्चना करें. भोलेनाथ के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. साथ ही ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहे और भोलेनाथ पर पंच अमृत, सुपारी, नारियल और बेल की पत्तियां चढ़ा दें. सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ जरूर करें और दूसरों को भी सुनाएं. पूजा का प्रसाद बांटकर शाम को पूजा के बाद व्रत खोलें.

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