नई दिल्ली. शरद पूर्णिमा का हिन्दूओं के लिए काफी महत्व है, शरद पूर्णिमा की रात को बेहद ही खूबसूरत रात कहा जाता है, कहा तो ये भी जाता है कि ये रात इतनी खूबसूरत होती है कि देवता खुद धरती पर इस रात को देखने के लिए आते थे. धार्मिक आस्था है कि शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से अमृत की वर्षा होती है. इस अमृत को लेने के लिए खीर बनाकर रात में रखा जाता है. जिससे उस खीर में अमृत मिल जाता है और उसे सुबह प्रसाद के तौर पर आप अपने को खिला सकते हैं.

इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है, इस दिन लोग दूध, चावल और चिनी की खीर बनाकर रात में खुले आसामान के नीचे छनी से ढक कर रखते हैं. दूध, चावल, चीनी इनका संबंध चांद और देवी लक्ष्मी से है रात में गिरते अमृत खीर में चला जाता है और उस खीर को सुबह प्रसाद को तौर पर बाटते हैं. इस खीर को खान से कई शरीर की परेशानिया दूर हो जाती हैं. कई मुश्किले कम हो जाता हैं. पौराणिक मान्यता है कि खीर में अमृत का अंश होता है इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा के दिन खीर जरुर खाना चाहिए और रात में खीर जरूर रखना चाहिए.

शरद पूर्णिमा को, को- जागृति यानी कोजागरा की रात भी कहा गया है. कोजारा का अर्थ होता है कौन जाग रहा है, कहा जाता है इस रात की देवी लक्ष्मी सागर मंथन से प्रकट हुई थीं. इसलिए इसे देवी लक्ष्मी का जन्मदिन भी कहा जाता है. अपने जन्मदिन पर लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए जाती है. इस रात लक्ष्मी की पूजा कौड़ी से करने से असीम कृपा होती है. काफी फलदायी होता है.

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