नई दिल्ली/ शब-ए-बरात मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रमुख पर्व के तौर पर मनाया जाता है. यह रात इबादत की रात होती है. इस मौके पर लोग पूरी रात अपने घरों और मस्जिदों में इबादत करते है और कब्रिस्तानो में जाकर अपने लिए और पूर्वजों के लिए अल्‍लाह से दुआ करते हैं. यह पर्व शाबान माह की 14वीं तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और 15वीं तारीख की रात तक मनाया जाता है. मुस्लिम धर्म में मान्यता है कि इस रात सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत की जाए और गुनाहों से तौबा की जाए तो अल्लाह इंसान उसकी इबादत स्वीकार करते हुए उसके सभी गुनाहों को माफ कर देता है. इस साल शब-ए-बरात का पर्व 28 मार्च से शुरू होकर 29 तक मनाया जाएगा.

शब-ए-बरात पर मिलती है गुनाहों की माफी

हिजरी कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बरात इबादत की रात होती है. यह पर्व शाबान माह की 14वीं तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और 15वीं तारीख की रात तक मनाया जाता है. इस रात लोग अल्लाह से अपनी बेहतरी के लिए दुआ करते है और रातभर इबादत कर गुनाहों की माफी मांगते है. इस रात अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर रोशनी करते है.

शब-ए-बरात मनाने की मान्यता

शब-ए-बरात के पीछे की मान्यता ये है कि इस दिन उहुद की लड़ाई में मुहम्मद साहब का एक दांत टूट गया था. जिस वजह से इस दिन उन्होंने हलवा खाया था. इसी वजह से इस दिन हलवा खाना सुन्नत माना गया है. ऐसा सुन्नी संप्रदाय के लोग मानते हैं. शिया संप्रदाय के लोगों का मानना है कि इस दिन आखरी शिया इमाम मुहम्मद अल महीदी का जन्म हुआ था. जिस कारण शिया संप्रदाय के लोगों के लिए ये जश्न का दिन माना जाता है.

ऐसे मनाया जाता है शब-ए-बारात

इस दिन गरीबों में इमदाद बांटने की परंपरा है. इस दिन मुस्लिम लोग मस्जिदों में और कब्रिस्तानों में इबादत के लिये जाते हैं. इसके साथ ही घरों को सजाया जाता है और लोग अपने समय को प्रर्थना करते हुए बिताते हैं. इस दिन लोग नमाज पढ़ने के साथ अल्लाह से अपने पिछले साल हुए गुनाहों की माफी मांगते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अल्लाह कई सारी रुहों को जहुन्नम से आजाद करते हैं. इसके साथ इस दिन लोगो द्वारा हलवा खाने की भी परंपरा है. मान्‍यता के मुताबिक चार मुकद्दस रातों आशूरा की रात, शब-ए-मेराज और शब-ए-कद्र में से एक शब-ए-बारात भी है. इसे बहुत ही मुकद्दस माना जाता है.

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