नई दिल्ली. शिव जी का सावन महीना शुभ माना गया है. कहा जाता है कि जो भी इस समय भोलेनाथ की सच्चे दिल से अराधना करता है उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं और भगवान की कृपा उसपर बरसती है. इस महीने देश के कई हिस्सों में लोग कांवड़ लेने भी जाते हैं और महाशविरात्रि पर पवित्र शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. इस बार 30 जुलाई को शिवरात्रि पड़ रही है. यूं तो साल में 12 शिवरात्रि होती हैं लेकिन सावन की शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है. इस दौरान भोलेनाथ की खास पूजा भी की जाती है और शिवलिंग का जलाभिषेक फलदायी माना जाता है. जानिए सावन शिवरात्रि पूजा का शुभ समय, जलाभिषेक सामग्री समेत अन्य जानकारी.

शिवरात्रि पर जलाभिषेक समय और पूजा विधि
शिवरात्रि पर पवित्र शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त 9.10 बजे से 2.0 बजे तक है. इस समय के बीच शिव जी की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है. शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा से पहले उन्हें स्नान कराना और अभिषेक करना जरूरी होता है. इसके लिए एक बर्तन में दूध, दही, घी, केसर, शहद, चंदन, भांग और चीनी अच्छे से मिलाएं और घोल से शिवलिंग का अभिषेक करें.

पूजा के दौरान प्रसाद में क्या लगाएं
प्रसाद के लिए गेंहू से बनी चीजें सबसे उत्तम बताई जाती है. भोलेनाथ को मूंग का भोग लगाने से एश्वर्य की प्राप्ति होती है. वहीं भोलेनाथ पर चने की दाल चढ़ाने से व्यक्ति को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशिर्वाद प्राप्त होता है. अगर सभी तरह के पापों का नाश चाहते हैं तो भोलेनाथ पर तिल चढ़ाना सबसे उत्तम माना गया है. भूलकर भी हल्दी या तुलसी शंकर भगवान पर अर्पित न करें.

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