नई दिल्ली: Ranga Panchami 2019: रंग पंचमी हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है जो कि होली के बाद आता है. आज यानी 25 मार्च सोमवार को रंग पंचमी का पावन त्योहार है. रंग पंचमी को कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, इस दिन लोग अबीर, गुलाल अपने सगे संबंधियों का लगाते हैं और दिनभर रंगपंचमी का जश्न मनाते हैं. रंग पंचमी के साथ ही रंगों के त्योहार होली का समापन होता है.

रंग पंचमी के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन आसमान में रंग उड़ाने से देवी, देवता खुश होते हैं और रज, तम का प्रभाव कम होता है.

क्‍या है रंगपंचमी?
होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाती है. रंगों का यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है. इसी वजह से इस पर्व को रंग पंचमी और कृष्ण पंचमी के नाम से जाना जाता है. रंग पंचमी का चलन महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और मालवा पठार इलाके में ज्यादा है.

रंग पंचमी मनाने के पीछे की मान्यता यह है कि इस दिन जो भी रंग इस्तेमाल किए जाते हैं या फिर जिन्हें एक-दूसरे पर लगाया जाता है, उसे हवा में भी उड़ाया जाता है. ऐसा करने से इन रंगों की ओर देवी-देवता आकर्षित होते हैं. इस पर्व को देवताओं के रंगों से भरे आशीर्वाद के रूप में भी देखा जाता है.

रंग पंचमी के दिन तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जिसमें मुख्य रूप से पूरनपोली है. रंगपंचमी यानी कृष्ण पंचमी के दिन लोग रंग-बिरंगे अबीर से खेलते हैं. राजस्थान के जैसलमेर स्थित मंदिर महल इलाके में रंग पंचमी खूब धूमधाम से मनाई जाती है. इस दिन हजारों लोग इकट्ठा होकर हवा में लाल, नारंगी और फिरोजी रंग उड़ाते हैं.

रंग पंचमी के दिन लोग देवी-देवताओं को खुश करने के लिए उन्हें अबीर-गुलाल चढ़ाते हैं. इस पर्व के मुहूर्त की बात करें तो यह त्योहार दिनभर मनाया जाता है. चूंकि इसके साथ ही होली का समापन होता है, इसलिए लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं.

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