नई दिल्ली. चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी 2 मार्च को रामनवमी 2020 मनाई जाएगी. इस दिन विशेष रूप से भगवान राम की पूजा का विधान है. राम भगवान को विष्णु जी का अवतार बताया गया है. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम ने जन्म लिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान विष्णु ने रामवतार अयोध्या में क्यों लिया.

दरअसल विष्णु जी ने कई युगों में धरती पर अवतार लिया है. विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु जी के धरती पर कुल 10 अवतार होंगे. 9 अवतार हो चुके हैं, आखिरी अवतार कल्कि के रूप में होगा. विष्णु जी के हर अवतार के पीछे कहानी है, ऐसी ही एक कहानी रामवतार के पीछे भी है.

शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र मनु और पत्नी सतरूपा जिन्होंने मनुष्य जाति की उत्पत्ति की. यह दोनों पति-पत्नी अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में पुत्र को राज सिंहासन सौंपकर विष्णु भक्ति के मन से वनवास के लिए चले गए थे.

वन में रहकर दोनों ने अन्न का त्याग किया और कई हजारों साल तक विष्णु जी की भक्ति की. कहा जाता है कि दोनों ने 6 हजार सालों तक सिर्फ जल ग्रहण किया और भगवान की तपस्या की. मनु और सतरूपा की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उनकी मनचाही मांग पूछी. तब उन्होंने भगवान से विष्णु जी जैसे संतान की इच्छा की. उनकी इच्छा का मान रखते हुए विष्णु भगवान ने कहा कि पूरे संसार में उनके जैसा कोई नहीं है.

विष्णु जी के दर्शन के बाद मनु और सतरूपा ने तपस्या जारी रखी. ताकि विष्णु भगवान उनकी इच्छा का मना रखा. जिसके बाद अगले जन्म मनु ने भगवान दशरथ और सतरूपा ने कौश्लया के रूप में अवतार लिया और राम जी ने भगवान विष्णु का अवतार बनकर अयोध्या में जन्म लिया. चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम ने जन्म लिया था.

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