नई दिल्ली. ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादाशी को निर्जला एकादशी कहते हैं. निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन माना जाता है. इस व्रत में भोजन और पानी दोनो का ही त्याग करना होता है. शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को विधिपूर्वक करने से धन-धानय की प्राप्ति होती है और तंगी से छुटकारा मिलता है. इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि साल भर में आने वाली सभी एकादशियां का फल केवल इस व्रत को रखने से मिल जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम ने किया था जिस कारण इसे भीम एकादशी भी कहा जाता है.

निर्जला एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. मान्यता है कि विष्णु भगवान की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा शाम के समय तुलसी जी की पूजा करनी चाहिए. गरीब, जरूरतमंद या फिर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दान करें. इस साल यग व्रत 13 जून को होगा. ऐसे में हम आपको बताने जा रहें है कि इस व्रत को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए क्या करें और क्या ना करें.

निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें:

  • इस दिन सुबह विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करें
  • सुबह माता-पिता और गुरू का आशिर्वाद लें
  • विष्णुसहस्त्रनाम और रामरक्ष का पाठ करें
  • रामचरित मानस के अरयकाण्ड का पाठ करें
  • इस दिन धार्मिक पुस्तक, फल, वस्त्रों का दान करें
  • अपने घर की छत पे पानी से भरा बर्तन जरूर रखें

श्री कृष्ण की उपासना करें

  • इस दिन लोगों को जल दान करने का बहुत महत्व माना जाता है
  • निर्जला एकादशी व्रत में क्या न करें:
  • भोजन और पानी ग्रहण न करें
  • किसी की भी निंदा न करें
  • माता-पिता और गुरू का अपमान न करं
  • एकादशी वाले दिन घर में चावल नहीं पकाना चाहिए
  • घर को साफ रखें, गन्दगी न करें

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