नई दिल्ली. आज यानी 29 सितंबर 2019 से शारदीय नवरात्रि का त्यौहार शुरू हो रहा है. नवरात्रि को नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाता है. नवरात्रि का त्यौहार 7 अक्टूबर को महानवमी के समापन और 8 अक्टूबर के दिन मंगलवार को विजय दशमी के के साथ समाप्ता होगा. हिंदू मान्यताओं के अनुसार कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि का त्यौहार शुरू होता है और कंचन पूजन व नवमी हवन के साथ ही इसका समापन होता है. मान्यता है कि गलत समय में कलश स्थापना करने से मां दुर्गा गुस्सा हो जाती है. रात के समय और अमावस्या वाले दिन भूलकर भी कलश स्थापना नहीं करनी चाहिए.

कलश स्थापना का सही समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है. अगर किसी कारण से आप इस समय कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो आप अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं. हर दिन का आठवां मुहुर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है. सामान्य तौर पर यह मुहूर्त 40 मिनट का होता है.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त:
कलश स्थापना दिन रविवार 29 सितंबर को द्विस्वभाव या स्थिर लग्न या अभिजित मुहुर्त दिन में 11:36 बजे से लेकर 12:24 बजे तक किया जायेगा. इसके साथ ही अगर शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी मिल जाये तो काफी अच्छा होगा.
सुबह 7:30 से 9 बजे तक चर चौघड़िया
सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक लाभ चौघड़िया
सुबह 10:30 से 12 बजे तक अमृत चौघड़िया
दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक शुभ चौघड़िया

कलश स्थापना सामग्री

मां दुर्गा को लाल रंग बेहद पसंद है इसलिए लाल रंग के आसन का इस्तेमाल करें, कलश स्थापना के लिए मिट्टी का एक पात्र, जौ, मिट्टी, पानी से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, खड़ी सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांचे पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और मां दुर्गा के श्रृंगार की सारी सामग्री

कलश स्‍थापना कैसे करें?

  • सुबह स्नान करें और मंदिर में साफ सफाई करने के बाद गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्‍योत जलाएं
  • कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं
  • इसके बाद तांबे के लोटे पर रोली से एक स्वास्तिक बनाएं, लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें
  • अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं, फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डाल दें
  • अब कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं
  • नारियल को एक लाल कपड़े में लपटें और उसे मौली से बांध दें.
  • नारियल को कलश के ऊपर रख दें
  • इसके बाद कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं.
  • कलश स्थापना के बाद नौं दिनों तक व्रत रखने का संकल्प लें
  • आप चाहें तो कलश स्‍थापना के साथ ही माता रानी के नाम की अखंड ज्‍योति भी जला सकते हैं.

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