नई दिल्ली. मां भगवती की पूजा वैसे तो सालभर की जाती है लेकिन नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का महत्व बढ़ जाता है. इस बार नवरात्रि 18 मार्च से शुरू हो रहे हैं. इन नौ दिनों मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. इस बार चैत्र नवरात्रि में एक नवरात्रि घट गया है. 25 मार्च को ही अष्टमी और नवमी पड़ रही है. इन नौ दिन मां के सभी रूपों की पूजा के दौरान अलग अलग मंत्रों और तरीकों से पूजा की जाती है.

साल में दो बार नवरात्रि आते हैं, शारदीय और चैत्र नवरात्र. चैत्र में आने वाले नवरात्रि को चैत्र नवरात्र कहा जाता है. कहा जाता है इन नौ दिनों के दौरान सूर्य का राश‌ि परिवर्तन होता है. इन दिनों सूर्य एक बार फिर 12 राश‌ियों में भ्रमण पूरा कर पहली राश‌ि मेष में प्रवेश करते हैं. ज्योतिषी के अनुसार कहा जाता है कि चैत्र नवरात्र के प्रथम द‌िन मां आद‌िशक्त‌ि प्रकट हुई थीं. इसी दिन देवी ने ब्रह्मा जी को सृष्ट‌ि न‌िर्माण करने को  कहा था. 

पहला नवरात्र – मां शैलपुत्री
इस दिन मां के शैलपुत्री रूप की पूजा अर्चना की जाती है. शैलपुत्रि को सफेद रंग खूब भाता है.
मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:’

दूसरा नवरात्र – मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. ब्रह्मचारिणी को संयम, तप, वैराग्य तथा विजय प्राप्ति की देवी कहा जाता है.
मंत्र – ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:’

तीसरा नवरात्र – मां चंद्रघंटा
मां भगवती का तीसरा रूप चंद्रघंटा देवी का होता है. मां चंद्रघंटा की पूजा सभी कष्टों से मुक्ति पाने के लिए होती है.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:’

चौथा नवरात्र – मां कुष्मांडा
नवरात्र का चौधा दिन कुष्मांडा देवी का होता है. अच्छे स्वास्थय और रोगों से मुक्ति की कामना के लिए कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:’

पांचवा नवरात्र- मां स्कंदमाता
मां का पांचवा रूप स्कंदमाता का होता है. मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व होता है. मोक्ष, सुख संपति के लिए मां के इस रूप की पूजा की जाती है.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:’

छठा नवरात्र – मां कात्यायिनी
नवरात्र के नौ पवित्र दिनों में छठे दिन मां कात्यायिनी की पूजा की जाती है. मां भगवती के इस रूप को रोग, शोक और दुखों से निवारण पाने के लिए पूजा जाता है.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:’

सांतवा नवरात्र – मां कालरात्रि
मां भगवती के सांतवा रूप कालरात्रि देवी है. ये सभी रूपों में सबसे भंयकर और शक्तिशाली रूप है. इस दिन दुश्मनों का नाश और दुखों को समाप्त करने की लिए पूजा करते हैं.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:’

आंठवा नवरात्र – मां महागौरी
नवरात्र के आंठवे दिन महागौरी की पूजा की जाती है. कुछ लोग आंठवे दिन ही कन्या पूजन करते हैं. महागौरी की पूजा करने से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:’

नौवा नवरात्र – मां सिद्धिदात्री
नौवां दिन नवरात्र का आखिरी दिन होता है. इस दिन भोग में कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं. इस दिन संपूर्ण मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए पूजा अर्चना की जाती है.
मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नम:’

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