नई दिल्ली. हिंदू धर्म में नाग पंचमी का खास महत्व बताया गया है. इस दिन व्यक्ति को सर्प दोष, पितृ दोष और कास सर्प से मुक्ति मिलती है. हर साल कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि और श्रावण (सावन) के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी मनाई जाती है. ज्योतिषों के अनुसार, नाग पंचमी के दिन विधि- विधान से काल सर्प दोष निवारण के पूजन से भक्त को पितृ दोष, सर्प दोष और काल सर्प दोष से मुक्ति की प्राप्ति होती है.

दरअसल कालसर्प योग में उत्पन्न जातक को मानसिक अशांति, धन प्राप्ति में बाधा, संतान, विलंब, अवरोध और गृहस्थी में हर समय कलह से गुजरना पड़ता है. साथ ही लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार कुशलता का पूरा फल नहीं मिल पाता है. इसलिए कहा जाता है कि इस योग में पैदा हुए लोगों को हर हाल में काल सर्प दोष का निवारण करा लेना चाहिए. मान्यता है कि अगर ऐसा नहीं करते हैं तो व्यक्ति को जीवन में तमाम तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है.

ज्योतिष ज्ञान के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो उसे कालसर्प योग या काल सर्प दोष भी कहा जाता है. काल सर्प दोष 12 प्रकार का होता है. कहा जाता है कि कुंडली में सर्प दोष रहने की वजह से लोगों को उनके अथक परिश्रम का फल नहीं मिल पाता है.

नाग पंचमी पर भूलकर भी न करें ये काम
1. नाग पंचमी के दिन धरती पर हल नहीं चढ़ाएं. भूमि न खोदें और न ही खेतों से साग काटें.

2. लोहे की कड़ाही या तवा आग पर न चढ़ाए और लोहे के बर्तन में कुछ खाना न पकाएं.

3. नाग पंचमी के दिन सुईं-धागे से किसी भी तरह की कपड़े की सिलाई न करें.

4. वहीं कई क्षेत्रों में किसान नई फसल उस समय तक नहीं इस्तेमाल करते जब तक उसका रोट नाग देवता पर न चढ़ाया जाए.

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