नई दिल्ली. 12 सिंतबर यानी बुधवार से मुहर्रम का महीना शुरु हो रहा है. सोमवार को इस इस्लामी महीने का चांद नजर नहीं आया था जिस वजह से मुहर्रम की पहली तारीख 12 सितंबर की गई जबकि यौमे आशूरा शुक्रवार 21 सितंबर को मनाया जाएगा. शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी और मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस बात की जानकारी दी है.

इस्लाम में नव वर्ष का पहला महीना मुहर्रम हजरत हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है. दरअसल इराक का एक जालिम बादशाह याजीद खुद को खुदा समझता था और अल्लाह में विश्वास नहीं करता था. वो चाहता था कि इस्‍लाम के पैगंबर हजरत मोहम्‍मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन उनके खेमे में शामिल हो जाएं लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जिसके बाद धर्म युद्ध छिड़ गया. हजरत हुसैन इस्लाम के रक्षा करते करते अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस युद्ध में शहीद हो गए.

Muharram 2018: कल से मुहर्रम का महीना शुरु, जानें इसका इतिहास और महत्व

बता दें कि मुहर्रम के महीने में ताजिया निकाली जाती हैं. इसके साथ-साथ ही शिया समुदाय के लोग मातम में पटा खेलते हैं जिसमें उनके शरीर पर भी काफी चोटें आती हैं लेकिन हजरत हुसैन की कुर्बानी के पीछे मुस्लिम समुदाय के लोग इन चोटों को कुछ नहीं समझते हैं. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मातम की वजह से काले कपड़े पहनकर सड़कों पर जूलूस निकालते हैं.

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