नई दिल्ली. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली एकादशी को हिन्दू नववर्ष की चौथी एकादशी या मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इस साल 3 मई को मोहिनी एकादशी पड़ रही है. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और किसी भी तरह के दान का काफी ज्यादा फल मिलता है. यह दिन मोहिनी एकादशी के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने इस दिन मोहिनी का रूप धारण कर राक्षसों का वध किया और पूरे विश्वस को उनके प्रकोप से मुक्त किया था.

मोहिनी एकादशी का व्रत रक्षा करने वाला होता है और इसी लिए इस व्रत को करने से भगवान परेशानियों से मुक्त करते हैं और किसी भी तरह के दोष से रक्षा करते हैं. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन भगवान के मोहिनी अवतार का पूजन करने का विधान है. कहा जाता है कि पद्म पुराण में यूधिष्ठर एवं कृष्ण के संवाद में इस व्रत का उल्लेख है जहां श्रीकृष्ण ने यूधिष्ठर को इस व्रत की महिमा सुना रहे हैं.

कृष्ण भगवान ने युधिष्ठर से कहा कि कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण पड़ने पर दान का जो फल प्राप्त होता है उससे कहीं ज्यादा फल व्रत को करने से होता है. मोहिनी एकादशी के व्रत को करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है. त्रेता युग में राम भगवान को महर्षि वशिष्ठ ने इस व्रत की महिमा बताई और उनके लिए विजय का मार्ग प्रशस्त किया था. उस युग में भगवान राम ने भी एकादशी के व्रत का पालन कर लंकापति रावण पर विजय प्राप्त की थी.

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