नई दिल्ली Makar Sankranti 2019 Dates Calendar: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का अपना ही महत्व है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है. प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है. 2019 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा. आपको बता दें कि मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एकमात्र ऐसा त्योहार है जो सूर्य कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है. अन्य सभी त्योहार चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं.

क्या होती हैं संक्रांति

संक्रांति सूर्य की एक विशेष स्थिति होती है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है. इसी विशेष स्थिति को ही संक्रांति कहा जाता है. मकर संक्रांति का महत्व इसलिए अधिक होता है क्योंकि इस दिन सूर्य दक्षिणायण से निकलकर उत्तरायण में आ जाता है. इसका अपना भौगोलिक और धार्मिक महत्व है. भौगोलिक इसलिए कि इस दिन के बाद भारत सहित उत्तरी गोलार्द्ध के क्षेत्रों में सूर्य की किरण सीधी पड़ने लगती है और ठंड से गर्मी की तरफ मौसम बढ़ता है. दिन बड़ी और रातें छोटी होने लगती हैं.

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

भौगोलिक महत्व के अलावा इसका धार्मिक महत्व भी है. सूर्य के दक्षिणायण के समय को देवताओं की रात्रि कहा जाता है और कहा जाता है कि इस समय देवता गण सोते हैं. जबकि उत्तरायण के छः महीनों को देवताओं का दिन कहा जाता है. महाभारत में भी भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति को ही चुना था. इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन ही गंगा, भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर समुद्र में जा मिली थीं. इसी कारण मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान का अपना एक महत्व है. इस बार 15 जनवरी दिन मंगलवार को संक्रांति पड़ रही है. सुबह 07:15 से दोपहर 12:30 बजे तक का कुल 5 घंटे 14 मिनट का शुभ मुहुर्त है जिसमें स्नान, ध्यान और दान-पुण्य किया जा सकता है.

देश के अलग-अलग भागों में अलग-अलग तरह से मनाई जाती है संक्रांति

भारत में मकर संक्रांति अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है. हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है, वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी कहा जाता है और इस दिन लोग खिचड़ी बनाकर दही आदि से खाते हैं. महाराष्ट्र में विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल और नमक सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं. वहीं गुजरात में यह उत्तरायण (पतंगोत्सव), असम में भोगली बिहु और तमिलनाडु में पोंगल के रुप में मनाया जाता है.

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